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सांझा राजस्व बजट

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1902-3 का संशोधन

1897 में राज्यों के साथ जो बंदोबस्त हुआ उसके समाप्त होने की सामान्य अवधि 1902-03 थी। बंदोबस्त में सामयिक संशोधन की केन्द्रीय कार्यवाही के अंतर्गत आगामी पांच वर्ष के लिए मानक प्रांतीय व्यय का निर्धारण करना और निर्णय की एक काम चलाऊ विधि द्वारा समाप्त होने वाले पांच वर्ष के दौरान औसतन व्यय को प्रारंभ होने वाले पांच वर्ष की अवधि के लिए मानक व्यय मान लिया गया। मौटे तौर पर इस प्रक्रिया में कोई भी त्रुटि नहीं थी यदि विगत और प्रारंभ होने वाली पांच वर्ष की अवधि जिससे वह संबंधित थी समान रूप से सामान्य होती। लेकिन जैसा कि हमने देखा था गत पांच वर्षों की घटनाएं पूरी तरह असामान्य थीं, और फलतः किसी भी गणना का विश्वसनीय आधार नहीं बनाया जा सकता था। भारत सरकार ने यही उचित समझा कि जब तक सामान्य स्थिति नहीं हो जाती प्रांतीय बंदोबस्त का पूर्णतया संशोधन हाथ में लेना ठीक नहीं होगा। बर्मा को छोड़कर संशोधन के लिए 1902-3 का अवसर इसलिए स्थगित कर दिया गया क्योंकि उस प्रांत के लिए अन्य प्रांतों की तुलना में गत संशोधन अनावश्यक रूप में बड़ा अनुकूल सिद्ध हुआ था। इन सब तथ्यों से पूरे 1896-97 के बंदोबस्त बहुत अच्छे और समानता के परिकलन पर आध ारित थे। व्यय पर राजस्व की बढ़ोतरी में किस सीमा तक वृद्धि हुई वह निम्न तालिका में दर्शाया गया हैःµ

बर्मा सन् 1897-98 से 1902-3 के अंतर

1901-2 के बंदोबस्त अनुमान

का अनुमानित स्तर

रुपये रुपये रुपये

राजस्व 2,93,81,000 3,73,86,000 80,05,000

व्यय 2,93,81,000 3,31,86,000 38,05,000

लाभ 42,00,000

इस प्रकार के परिणाम को जारी रखना साम्राज्यवादी सरकार के लिए खराब और अन्य प्रांतीय सरकारों के लिए अन्यायपूर्ण समझा गया। बर्मा का आर्थिक बंदोबस्त