184 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
नियमानुसार संशोधित किया गया। समकालिक संशोधन के स्थापित नियम के होते हुए, जबकि वह मौका 1902-3 में स्वयं आ गया था। इस संशोधन के परिणाम स्वरूप भारत सरकार ने इस लाभ को संयुक्त राजस्व में प्रांत के हिस्से में समायोजित कर दिया। भू-राजस्व के हिस्से में दो तिहाई से आधे की कमी कर दी गईं आबकारी में आधे से एक तिहाई और अन्य लघु शीर्षों को व्यय के प्रांतीयकृत शीर्षों में पहले ही मिला दिया गया। इन परिवर्तनों के कारण बर्मा का मानक राजस्व और व्यय 1903 से 1906 के नए संशोधन में निम्नलिखित योग से प्राप्त हुआःµ
राजस्व समंजक कुल राजस्व कुल व्यय
रु. रु. रु. रु.
2,78,31,000 53,02,000 3,31,33,000 3,31,33,000
एक अन्य प्रांत जिसका बंदोबस्त संशोधित किया गया पंजाब था। लेकिन इसका कारण भिन्न था। उत्तर पश्चिम प्रांत में जो भू-क्षेत्र आता था वह उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत और संयुक्त प्रांत आगरा और अवध में विभाजित था, जिसे आमतौर पर संयुक्त प्रांत कहा जाता है। इसके साथ ही पंजाब के कुछ जिले भी इससे अलग किए गए थे और उन्हें नवसृजित उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत में विलीन कर दिया गया था। इससे प्रांतीय राजस्व और व्यय का पुनः समायोजन करना पड़ा, लेकिन बंदोबस्त के किसी भी पूर्णतया संशोधन की आवश्यकता नहीं हुई। जो भी परिवर्तन हुए समंजक आबंटन में आवश्यक रूपांतरण तक ही सीमित थे।
1904-5 का अर्द्धस्थाई संशोधन
उपर्युक्त अपवादों के साथ 1897 के बंदोबस्त वर्ष 1904 के अंत तक बढ़ा दिए गए। संशोधन के स्थगन का प्रमुख कारण जैसाकि ऊपर बताया जा चुका है वर्ष 1901-2 की असामान्य स्थितियों की वजह से है। लेकिन एक अन्य कारण यह भी था, जिसकी वजह से भारत सरकार इतनी अधिक इच्छुक थी कि संशोधन का कोई भी कदम उठाने से पूर्व सामान्य स्थिति बहाल हो जाए। ऐसे ही समय में भारत सरकार ने प्रांतीय वित्त में स्थायित्व लाने का प्रयत्न किया। सन् 1881 में प्रांतीय वित्त के आधार के रूप में वार्षिक बजट प्रणाली के स्थान पर पांच वर्षीय बजट प्रणाली प्रतिस्थापित की गई। यद्यपि निरंतरता और स्थायित्व की ओर यह स्पष्ट सुध ार था लेकिन इसे पूरी तरह काफी नहीं माना गया। इसके अंतर्गत प्रांतीय सरकारों को