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सांझा राजस्व बजट

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सन् 1907 तक सभी प्रांतों को अर्द्ध-स्थाई बंदोबस्त की सीमा के अंतर्गत ले लिया गया और प्रांतीय वित्त योजना के बिना आगे किसी परिवर्तन और बिना बाधा के चलते रहने की उम्मीद की गई। लेकिन जैसा कि घटित हुआ और देखा गया, मद्रास और संयुक्त प्रांत के साथ 1904 में सम्पन्न अर्द्ध-स्थाई बंदोबस्त अन्य प्रांतों की तुलना में जो उनके सामने शर्ते पेश की गई थीं, उनके लिए थोड़ा अन्यायपूर्ण साबित हुआ। इस अन्यायपूर्ण रवैये को दूर करने हेतु जो अर्द्ध-स्थाई बंदोबस्त में संशोधन आवश्यक था दोनों प्रांतों के संयुक्त शीर्षों में पहली अप्रैल 1907 से हिस्सेदारी में आधे की वृद्धि कर दी गई, निम्न अपवादों को छोड़करःµ

मद्रास संयुक्त प्रांत

राजस्व राजस्व

  1. पंजीकरण, पूर्णतया प्रांतीय 1. भू-राजस्व, 3/8 प्रांतीय कम से कम 240

लाख तक की गारंटी

  1. भू-राजस्व। 308 लाख की 2. सिंचाई। प्रमुख सिंचाई कार्यों से कम से कम

कम से कम प्राप्ति की 60 लाख की प्राप्ति की गारंटी यदि

गांरटी यदि प्रांतीय हिस्सेदारी इस राशि से प्रांतीय हिस्सेदारी में कमी आती है।

इस राशि से कम आती है।

(1) पंजीकरण, पूर्णतया व्यय प्रांतीय

(2) भू-राजस्व, पूर्णतया प्रांतीय

मानक व्यय यदि मानक राजस्व से अधिक होता है तो उस अधिकता के अंतर को पूरा करने के लिए निश्चित आबंटन निम्न प्रकार थेःµ

मद्रास को 22,57,000 रुपए

संयुक्त प्रांत को 13,89,000 रुपए

इस प्रकार ब्रिटिश भारत में प्रांतीय वित्त की योजना नियत बजट, निर्दिष्ट राजस्व बजट और सांझा राजस्व बजट द्वारा धीरे-धीरे लेकिन विभिन्न चरणों में आगे बढ़ी, उस सीमा तक जिन्हें संबंधित पक्षों द्वारा पूरी तरह से अंतिम मान लिया गया था। उनकी उम्मीदें किस प्रकार पूरी हुई इस बात का निर्णय प्रांतीय वित्त के वार्षिक लाभ और घाटे की स्थिति को देखकर किया जा सकता है। साथ ही उनके व्यतिक्रम के प्रभाव क्षेत्र से जैसा कि आगे की तालिका में दर्शाया गया हैःµ