ब्रिटिश भारत में प्रांतीय वित्त व्यवस्था का विकास - Page 263

‘‘....इन अदृश्य प्राकृतिक आपदाओं पर असाधारण प्रकृति का जो व्यय हुआ उसे साम्राज्यवादी सरकार ने झेला और उसकी अदायगी साम्राज्यवादी खजाने से हुई, लेकिन यह आड़े वक्त की मदद जरूरतों को देखते हुए बराबर की सिद्ध नहीं हुई और भारत सरकार को प्रांतीय राजस्व में विशेष अनुदान के लिए बाध्य होना पड़ा।’’

µडॉ. भीमराव अम्बेडकर