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परिवर्तन की आवश्यकता
राष्ट्रपति और संसदीय शासन प्रणालियों वाली दो प्रकार की सरकार बहुधा परस्पर विपरीत होती है। ख्1, संसदीय शासन प्रणाली की सरकार को राष्ट्रपति शासन प्रणाली की सरकार की अपेक्षा अधिक लाभदायक माना जाता है। संसदीय शासन प्रणाली की सरकार के लिए यह दावा किया गया है ख्2, कि कोई भी अन्य व्यवस्था इतनी सक्षम नहीं लगती जो प्रभावकारी रूप से उन व्यक्तियों के नियंत्रण में अपना प्राधिकार केंद्रित करे जो लोकप्रिय इच्छा को व्यक्त करते हैं। इसका अर्थ सहमति द्वारा सरकार है, जो यह आश्वस्त करती है कि ऐसे व्यक्ति समूह द्वारा सरकार के कार्यों का कार्यान्वयन करना है जो उत्तरदायी होते हैं और जिनके विचार विधान-मंडल के बहुमत के अनुकूल होते हैं, सरकार का केवल यही स्वरूप है जिसमें सशक्त कार्यपालिका की व्यवस्था की जाती है जो स्थाई सरकार के लिए अत्यंत आवश्यक होती है जिसे अच्छी सरकार की आवश्यकताओं को खतरे में डाले बिना ही इतनी अधिक अनुत्तरदायी नहीं हो पाती, यह उच्च अधिकारियों को अपने कृत्यों को प्रतिपादित करने का भार सौंपती है अथवा ऐसा न होने पर उन्हें बर्खास्त कर दिया जाता है, वह विधान-मंडल को विधायिका और प्रशासन दोनों क्षेत्रों में सर्वोच्च बनाती है जिसमें सरकार ऐसी बने ताकि जन जीवन न केवल जीने योग्य हो अपितु जीवन भी श्रेष्ठ बने। इस बात पर जोर दिया गया है कि क्या किसी अन्य शासन प्रणाली की सरकार अत्याचार को बढ़ावा देने वाली अथवा शांति के नाम पर प्रगति को अवरुद्ध करने वाली व्यवस्था का इतने प्रभावी ढंग से निवारण कर सकती है। संसदीय शासन प्रणाली की सरकार ने संयुक्त रूप से प्रगति प्राप्त करने के लिए अपने सर्वोच्च गुण को इतनी अधिक दक्षता से प्रतिपादित किया जबकि प्रारंभ में ब्रिटिश संविधान के उद्भव के साथ यह गुण यकायक विकसित हो गया था। इस शासन प्रणाली को ऐसे अनेक देश आधारभूत संस्था के रूप में स्वीकार करते हैं जिनके राजनीतिक विप्लवों के कारण उस समय
देखिए जेम्स ब्राइस, दी अमेरिकन कामन वेल्थ, 1910, खंड 1. अध्याय 20
देखिए सर सिडनी लो, द गवर्नेस ऑफ इंग्लैंड, 1914 अध्याय 3, यत्र-तत्र