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परिवर्तन की आवश्यकता

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बात का अपमान किया जिसमें राष्ट्रवाद की झलक दिखती हो। इसका कारण यह था कि ये सभी बातें उसके स्वभाव के विरुद्ध थीं। परन्तु एक अनुत्तरदायी सरकार ऐसी बातों के निभाने के लिए अशक्त होती है जैसा कि वह करना चाहती है। इसका कारण है कि उसका प्राधिकार बाह्य अवरोध की संभावना से सीमित होता है। कुछ ऐसी बातें है जो वह करेगी परन्तु उसके प्राधिकार को अवरोध पैदा होने के भय से वह ऐसा नहीं करेगी। सीजर रोम वासियों की प्रार्थना को ठुकराने का साहस नहीं कर पाया।

संसद चाहते हुए भी उपनिवेशों पर कर लगाने का साहस नहीं कर पायी। इसी कारण भारत सरकार ने जाति प्रथा के उन्मूलन का साहस नहीं किया, भारत सरकार एक विवाह पद्धति को नहीं चला सकी तथा उत्तराधिकार के नियमों में परिवर्तन नहीं कर सकी, अंतर्विवाह के वैध न बना सकी अथवा चाय बागवानी करने वालों पर कर नहीं लगा सकी। प्रगति में सामाजिक जीवन की वर्तमान संहिता का हस्तक्षेप किए जाना निहित है तथा हस्तक्षेप से प्रतिरोध उत्पन्न होने की संभावना है।

उसी प्रकार कोई भी सरकार जो जनता की होती है और उनसे अलग नहीं की जा सकती प्रगति के पथ पर बढ़ने का साहस नहीं कर सकती क्योंकि वह यह बात जानने की स्थिति में होती है कि आज्ञाकारिता कहां समाप्त होती है और कहां प्रतिरोध प्रारंभ होगा लेकिन भारतीय कार्यपालिका जनता की नहीं थी अतः वह जनता की भावना को महसूस नहीं कर सकी। इस विषय का सारांश यह है कि अनुत्तरदायी कार्यपालिका जो भारत में अपनी सत्ता बनाए हुए थी अपने प्राधिकार और जीवन को अधिक अच्छा बनाने की दोनों सीमाओं के बीच में सन्निपात ग्रस्त हो गई थी। इसमें गतिरोध आ गया। इस कार्यक्रम के कुछ भागों को वह कार्यान्वित नहीं करेगी और कार्यक्रम के दूसरे भाग को अपने हाथ में न ले सकेगी। इसके फलस्वरूप जहां तक लोगों के सामाजिक और नैतिक जीवन का प्रश्न है ऐसी स्थिति में मुगल सरकार से बदल कर ब्रिटिश सरकार का निर्माण केवल शासकों का ही परिवर्तन था और इससे शासन पद्धति में किसी प्रकार का कोई अंतर नहीं आया। ब्रिटिश द्वारा अंशतः वरीयता और अंशतः आवश्यकता के आधार पर हस्तक्षेप न करने के नियम को स्वीकार करने सेµ

‘‘भारत के लोगों ने इस विशिष्ट सरकार के अधीन कोई ऐसी सशक्तता नहीं देखी जो

इससे पूर्व अपने थके और विस्मृत इतिहास के दौरान परिश्रम करते रहे और आराधना

में लगे रहे, वे अपना जीवन बिताते रहे तथा मृत्यु को प्राप्त हो गए। राजनीतिक दृष्टि

से एक परिवर्तन हुआ परन्तु एक तानाशाह का स्थान दूसरे तानाशाह ने ले लिया।

उन्होंने वे सभी प्रबंध स्वीकार किए जो उनके अनुकूल थे। ख्1, तथा वे उस चीनी दर्जी

के समान थे जिसे पुराने कोट का नमूना दिया जाता है जो उसी के समान वैसा

ही कोट ख्2, थिगलियां तथा अन्य सभी डिजाइन के साथ तैयार करता है।’’

  1. बर्मा में मतदान कर जारी रहा क्योंकि यह कर उस दिन लागू था जब बर्मा पर विजय प्राप्त की गई थी।
  2. बर्नार्ड हफटम ब्यूरोक्रेटिक गवर्नमैंट।