272 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विधान-मंडल को सरकार बनाने अथवा समाप्त करने की शक्ति प्रदान की गई थी ताकि जनता की, जनता के लिए और जनता द्वारा सरकार स्थापित हो। देश की राजनीतिक संस्थाओं के आधार पर नीति में ऐसे परिवर्तन के अनुकूलन में परस्पर संबंध, प्रशासनिक विधायिका और वित्तीय व्यवस्था में सुदूरगामी परिवर्तन निहित थे। 1919 के सुधार अधिनियम के फलस्वरूप प्रारंभ किए गए प्रांतीय वित्त की पद्धति उस समय लागू पद्धति के अंतर्निहित दोषों द्वारा उत्पन्न नहीं हुई थी। दूसरी ओर यह पद्धति उत्कृष्ट रूप से व्यावहारिक थी। वे प्रभावित हुए क्योंकि यह पद्धति कुल मिला कर उस महान क्रांति के असंगत थी जिसने उस अधिनियम द्वारा देश की सरकारी पद्धति को प्रभावित किया।
इन परिवर्तनों की प्रकृति, उनके विस्तार तथा उनकी पर्याप्तता आगामी दो अध्यायों की विषय-सामग्री होगी।