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परिवर्तन की आवश्यकता

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से अपील द्वारा किसी संघर्ष के मामलों में विधान-मंडल को परिवर्तित करने के लिए किसी भी संवैधानिक उपाय के बिना सरकार के लिए यह दायित्व था कि वह ऐसे मामले में तब कार्य करे जहां वह विधान-मंडल की इच्छाओं का आदर नहीं कर पाए। योजना अविश्वस्त थी जैसा कि इससे पूर्व भारतीय संविधान में सुधार करने के प्रयत्न किए गए थे। क्योंकि इस योजना में कार्यपालिका और विधान-मंडल ने अपने अधि देश प्राप्त किए थे और वे अलग-अलग शक्तियों के प्रति उत्तरदायी थे। यह योजना अविश्वस्त इसलिए थी क्योंकि इसने इस संभावना की उपेक्षा की कि दो अधिदेश परस्पर सहमत नहीं हो सकते और ऐसी दशा में संघर्ष होगा। यह संघर्ष गैर-संसदीय कार्यपालिका में अंतर्निहित था। संसदीय कार्यपालिका के साथ संसदीय सरकार का स्वरूप इसे बचाने का एकमात्र मार्ग था।

इस दृष्टिकोण से 20 अगस्त, 1917 की घोषणा भारतीय संविधान के विकास के इतिहास में अधिक महत्त्वपूर्ण है। उस तारीख को भारत सचिव (सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया) ने हाउस ऑफ कामन्स में यह घोषणा की थी कि ‘‘महामहिम की सरकार की जो नीति है उससे भारत सरकार पूर्णतया सहमत है, इस नीति के अनुसार भारतीयों को प्रशासन की प्रत्येक शाखा और स्वशासी संस्थाओं के शनैः शनैः विकास में भागीदार होना चाहिए ताकि ब्रिटिश साम्राज्य के समन्वित भाग के रूप में उत्तरदायी भारत सरकार का प्रगतिशील आविर्भाव हो। उन्होंने यह निर्णय किया है कि इस दिशा में ठोस कदम यथासंभव शीघ्रता से उठना चाहिए...’’

‘‘मैं कहना चाहूंगा कि इस योजना की प्रगति क्रमिक अवस्थाओं में ही उपलब्ध

हो सकती है। ब्रिटिश सरकार और भारत सरकार दोनों पर ही भारत के लोगों

के कल्याण और उन्नति का दायित्व निर्भर करता है अतः उन्हें प्रत्येक उन्नति

के समय और साधन का न्यायाधीश होना चाहिए तथा उन्हें उन लोगों से प्राप्त

सहयोग से मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए जिन पर सेवा के नए अवसर इस प्रकार

प्रदत्त होंगे तथा उस सीमा तक होंगे जिसमें उसे प्राप्त हो कि उनके उत्तरदायित्व

की भावना में विश्वास निहित है।’’

यह महत्त्वपूर्ण घोषणा एक युग के अंत को व्यक्त करती है तथा एक नए युग का सूत्रपात करती है। इस निश्चय ने ही उस पुरानी संकल्पना को त्याग दिया जिसके अंतर्गत कार्यपालिका ने जैसा ठीक समझा विधान-मंडल की इच्छाओं की जानकारी ली जिसे देश के प्रशासन में बढ़ता हुआ भाग और प्रभावित करने वाली तथा आलोचना करने के बढ़ते हुए अवसर भी दिए गए परन्तु सरकार को नियंत्रित करने के लिए ऐसा नहीं किया गया। नई संकल्पना के अधीन यह उद्देश्य था कि