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308 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

गया जिसमें उस सिद्धांत की व्यवस्था की गई थी। जहां तक कर लगाने संबंधी विधान के क्षेत्र का संबंध है यह व्यवस्था की गई कि ख्1, ःµ

प्रांत में विधायी परिषद् गवर्नर जनरल की पूर्व स्वीकृति के बिना अनुसूची 1 में सम्मिलित किसी कर को स्थानीय सरकार के प्रयोजनों के लिए आरोपित करने के किसी कानून के बनाने अथवा उसे कार्यान्वित करने के लिए विचार कर सकती है।’’ अनुसूची में कर लगाने की मदें शामिल की गई हैं जो इस प्रकार हैंःµ

  1. कृषि प्रयोजनों के अलावा अन्य प्रयोजनों के लिए प्रयोग की जाने वाली

भूमि पर कर।

  1. किसी संयुक्त परिवार में उत्तरजीविता द्वारा उत्तराधिकार अथवा अधिग्रहण

कर।

  1. कानून द्वारा स्वीकृत बाजी लगाने अथवा जुआ खेलने पर कर।

  2. विज्ञापनों पर कर।

  3. मनोरंजन पर कर।

  4. किसी विशिष्ट विलासिता की वस्तुओं पर कर।

  5. रजिस्ट्रेशन फीस।

  6. ऐसे शुल्कों के अलावा स्टाम्प शुल्क जिसकी राशि भारतीय विधान-मंडल

द्वारा निर्धारित की जाती है।

गैर-कर विधान के मामले में नियमों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया कुछ अलग हो गई है। कर विधान के बताए गए नियमों के मामले में पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं थी।

गैर-कर विधान के मामलों में ऐसे नियमों की आवश्यकता थी जिनमें पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता थी। पूर्व स्वीकृति के नियमों की आवश्यकताओं में इस अंतर कर प्रभाव यह था कि कर-विधान के मामलों में प्रांतीय सरकार कुछ नामांकित कर ही

  1. भारत सरकार अधिनियम, 1919 की धारा 10(3)(क) के अधीन नियमावली अनुसूचित कर नियम।
  2. भारत सरकार के अधिनियम 1919 की धारा 10(3) एल स्थानीय विधान मंडल पूर्व स्वीकृति नियम के

अंतर्गत नियम। यह ध्यान रखना चाहिए कि यदि प्रांतीय विधेयक को पूर्णगामी स्वीकृति की आवश्यकता

नहीं फिर भी यह नहीं मान लेना चाहिए कि यह उपरोक्त नियमों के तहत कानून बन गया है क्योंकि

इसे प्रांतीय विधायिका की स्वीकृति मिल गई है चूंकि उपरोक्त अधिनियम की धारा 12(1) के तहत

बने नियम जिन्हें रिजर्वेशन ऑफ बिल्स रूल्स कहा जाता है के अन्य नियमों के तहत प्रांत का गवर्नर

कुछ को रिजर्व रखेगा और अन्य कुछ को रिजर्व रख सकता है जिन पर गवर्नर जनरल की स्वीकृति

प्राप्त होनी चाहिए ताकि वे कानून बन सकें यद्यपि उन्हें पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है।