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परिवर्तन की समालोचना 323

वस्तुतः अपर्याप्त थे। आगे दी गई तालिका में मानक प्राप्तियों और व्यय की तुलना की गई है और व्यय से संभावित अग्रिम राशि को पूरा करने के लिए उनके बीच शेष मार्जिन को दिखाया गया है।

मानक राजस्व और मानक व्यय

प्रांत मानक राजस्व मानक व्यय मानक व्यय की तुलना

में मानक राजस्व

का लाभ या घाटा मद्रास 14,98,02 14,07,20 90,82

बम्बई 12,09,70 11,55,03 54,67

बंगाल 8,55,28 8,61,13 -5,85

संयुक्त प्रांत 12,29,88 11,06,56 1,23,32

पंजाब 9,73,51 9,10,69 62,82

बर्मा 8,24,28 7,84,78 38,50

बिहार और उड़ीसा 4,30,39 4,20,70 9,69

मध्य भारत

(सेंट्रल प्रोविंसेज) 4,35,37 4,38,80 -3,43 असम 1,81,46 1,78,25 3,21

इस संबंध में यह स्पष्ट है कि दो प्रांतों को छोड़ कर मानक व्यय के ऊपर मानक राजस्व ने पर्याप्त मार्जिन छोड़ा है। केवल बंगाल और सेंट्रल प्रोविंसेज में कोई मार्जिन नहीं था जिसका कारण यह था कि मानक व्यय मानक राजस्व से कुछ ही अधिक था। परन्तु बंगाल के मामले में केन्द्रीय सरकारर को अंशदान में छूट द्वारा इस दोष को ठीक कर लिया गया और सेंट्रल प्रोविंसेज के मामले में मानक राजस्व के ऊपर मानक व्यय की अधिकता वस्तुतः बहुत कम थी। इसे छोड़कर शेष प्रांतों में वास्तविक मार्जिन बहुत अधिक था। अब हमें वास्तविक आंकड़ों की ओर ध्यान देना चाहिए और उनकी मानक आंकड़ों से तुलना करनी चाहिए। सबसे पहले हम प्रांतीय बजटों के राजस्व के बारे में विचार करेंगे क्या मानक राजस्व से वसूल किया गया राजस्व कम हो गया है। आगे दी गई तालिका में नए अधिनियम के अंतर्गत किए गए वित्तीय आबंटन में प्रांतों की वसूल की गई प्राप्तियों की माने गए मानक आंकड़े की तुलना साधारण हैःµ