ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रशासन और वित्त प्रबंध 21
150 रु. से 300 रु. तक 16 रु.
300 रु. से 800 रु. तक 32 रु.
800 रु. से 1,600 रु. तक 50 रु.
1,600 रु. से 3,000 रु. तक 100 रु.
5,000 रु. से 10,000 रु. तक 250 रु.
10,000 रु. से 25,000 रु. तक 500 रु.
25,000 रु. से 50,000 रु. तक 750 रु.
50,000 रु. से 1,00,000 रु. तक 1,000 रु.
1,00,000 रु. से अधिक पर 2,000 रु.
इसके अतिरिक्त प्रदर्शित लिखित पत्र, सम्मन, उत्तर, प्रत्युत्तरवादी का प्रतिवादी को उत्तर, पूरक अदालती बहस, वकीलों की अदालती बहस का प्रमाण-पत्र (सनद) सभी पर टिकटों की आवश्यकता होती है। ये टिकटें अदालत की अवस्था के अनुरूप बदलती हैं।
XI. टिकट (स्टाम्प)ः शुल्क पहली बार बंगाल में 1797 में शुरू किया गया जो सभी लिखित दस्तावेजों, जैसे ठेके, विलेखों, हस्तान्तरण पत्रों, पट्टों, मुख्तारनामोंं, बीमा पालिसियों, वचन पत्रों, रसीदों, जमानतनामों और सामान्य कानूनी कार्यवाही पर लगाया जाता था। (25 रु. से कम के विनिमय पत्रों एवं 50 रु. से कम की रसीदों पर इनकी छूट थी)।
मद्रास में स्टाम्प पेपर व्यवस्था सर्वप्रथम 1808 में मुख्यतया कानूनी कार्यवाही के लिए आरंभ की गयी और 1816 में अनुबंध पत्र, विलेख, पट्टे, बंधक पत्र, विनिमय पत्र एवं रसीदें इसके अंतर्गत लायी गई थीं।
बंबई में यह कर सर्वप्रथम 1815 में आरंभ किया गया। स्टाम्प वितरण की अंग्रेजी विधि भारत में अपनाई गयी थी।
टिकट विक्रेता टिकट जिलाधीश से प्राप्त करते हैं। टिकट विक्रेता टिकटों के लिए जमानत देते हैं और टिकटें जरूरतमंद लोगों को बेचकर बिक्री पर कुछ प्रतिशत प्राप्त करते हैं।’’
XII. टकसाल राजस्व : सिक्के की ढलाई पर 2 प्रतिशत की दर से सिक्का ढलाई मुनाफा के रूप में टकसाल राजस्व प्राप्त किया जाता था।