26 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
असैनिक, न्यायिक और पुलिस पर व्यय।
लोक निर्माण कार्यों पर व्यय।
भारत के ऋण पत्रों पर ब्याज।
समझौतों तथा उनके अनुबंधों के अंतर्गत देशी राजाओं को भत्ते एवं उनके कार्यक्रमों पर व्यय।
गृह (आंतरिक) व्यय, जिसमें निम्न मदें शामिल थींµ
क. गृह ऋण पत्रों पर ब्याज।
ख. ईस्ट इंडिया भंडार के मालिकों को लाभांश।
ग. महारानी की सेना और स्थापना पर व्यय।
घ. ईस्ट इंडिया हाउस एवं नियंत्रण बोर्ड के सदस्यों का खर्च।
व्यय का कालक्रमानुसार तालिकाबद्ध विवरण कुछ महत्त्व का हो सकता है। सन् 1800 से 1857 की अवधि का चयन कर हम प्रत्येक दस वर्ष की अवधि को प्रतिनिधि वर्ष मान कर और उस वर्ष विशेष राजस्व प्राप्ति पर हुए व्यय के प्रतिशत के अनुपात को अंकित कर सकते हैं जो इस प्रकार हैः
वर्ष शुद्ध परिव्यय सैनिक ऋण का असैनिक न्यायिक प्रांतीय भवन एवं
राजस्व व्यय ब्याज व व्यय पुलिस किलेबंदी
राजनैतिक व्यय
पौंड पौंड % % % % % %
स्टर्लिंग स्टर्लिंग
1809-10 11,238,000 11,076,000 58,877 18.010 7.221 7.525 1.931 1.639
1819-20 13,016,000 12,934,000 64,290 12.805 8.900 6.800 2.093 1,756
1820-30 14,200,000 13,107,000 53,754 12.124 9.275 7.107 1.535 2.000
1830-40 13,742,000 13,004,000 57,721 9.756 12.296 9.525 2.062 1.428
1840-50 19,510,000 16,404,000 51,662 10.512 8.902 7.100 2.062 1665
1857 33,303,000 28,079,000 45,55 7.19 9.62 9.38 - - लोक निर्माण
प्रोफेसर एडम्स के अनुसार एक देश की वित्त व्यवस्था उसके विकासात्मक व्यय के दृष्टिकोण से आंकी जाती है और एक देश के विकासात्मक व्यय में लोक निर्माण का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसी मानदंड को अपनाते हुए हम ईस्ट इंडिया कंपनी की संपूर्ण वित्त-व्यवस्था को दोषी ठहराने के लिए विवश हो जाते हैं।