भूमिका
आने वाले लंबे समय तक अध्येता (विद्यार्थी) भारतीय वित्त अथवा अर्थशास्त्र का अध्ययन प्रस्तुत करने के लिए क्षमा-याचना करने की पारंपरिक प्रताड़ना से बचे रहेंगे। लेकिन दूसरी ओर मुझे भय है कि उतने ही लंबे समय तक उन्हें अपने अन्वेषणों की कमियों के लिए क्षमा याचना करनी होगी। विषय का प्रतिपादन विश्लेषणात्मक होने पर भी समुचित विश्लेषाणत्मक अध्ययन के लिए बहुधा ऐतिहासिक परिवेश की आवश्यकता होती है। दुर्भाग्य से भारतीय वित्त व्यवस्था के क्षेत्र में आरंभिक परिश्रम नहीं किया गया। परिणामस्वरूप इस क्षेत्र के अगुआ की राह में अनेक कठिनाइयां हैं। कभी-कभी पहलुओं की पूर्ण व्याख्या करने के कारण परेशानी पैदा हो जाती है। अक्सर किसी त्रुटि के अचानक उत्पन्न हो जाने की आशंका पैदा हो जाती है। और ऐसी स्थिति में जब अध्येता को बचाने वाला कोई नहीं होता तो झुंझलाहट होने के सिवाय कुछ हाथ नहीं लगता। यह स्वाभाविक ही है कि जब योग्य अध्येता को उसके विषय से संबंधित सामग्री प्राप्त होती है तो वह खुशी से झूम उठता है। लेकिन लंबी और थकाऊ खोज के पश्चात् ही वह भूसे में से दाना बीन पाने के समान सफल होता है। फिर भी कभी-कभी सामग्री के स्रोत ही मिथ्या मार्गदर्शक सिद्ध हो जाते हैं और इस प्रकार पर्याप्त समय और ऊर्जा का ”ास होता है।
वास्तव में वर्तमान अध्ययन कार्य को करते समय यही कठिनाइयां सामने आई हैं। अध्येता को अध्ययन कार्य तैयार करने के लिए कोई भी पुस्तक उपलब्ध नहीं है और उसका सही मार्गदर्शन करने वाला भी कोई नहीं है। इन कठिनाइयों के बावजूद इस अध्ययन को सम्यक और सारगर्भित बनाने का प्रयास किया गया है। फलस्वरूप यह प्रयास अत्यंत श्रमसाध्य रहा है_ लेकिन मैं इस मेहनत के बारे में कहना नहीं चाहता और न ही मैं विद्यार्थी को उन पुस्तकों और दस्तावेज, जिनका मैंने इस ग्रंथ की रचना के दौरान अध्ययन किया है, की लंबी सूची का ब्यौरा देकर उन्हें आश्चर्यचकित करना चाहूंगा। बल्कि मैं तो इसकी कमियों की ओर इशारा करना चाहता हूं। इसमें अनेक कमियां हो सकती हैं जिन्हें एक जानकार समीक्षक ही बता सकता है। मैं आशा करता हूं कि ये कमियां ऐसी गंभीर नहीं हैं जो इस ग्रंथ के महत्त्व को कम करती हों। उनमें से कुछ के लिए मैंने उस तिथि का उल्लेख किया है जब से भारत में वित्त का स्थानीय विकेन्द्रीकरण आरंभ हुआ, लेकिन मैं महसूस करता हूं कि वह सबसे पहली तिथि नहीं है और संभव है कि मेरे द्वारा दी गई तिथि के पहले ही वित्त का स्थानीय