परिचय - Page 76

परिचयः विषय की परिभाषा और रूपरेखा 61

कर दिया गया और 1822 ई. से आरंभ विकेन्द्रीकरण प्रांतीय वित्त व्यवस्था

का विकेन्द्रीकरण है जिसके फलस्वरूपःµ

(3) स्थानीय वित्त व्यवस्था को प्रांतीय वित्त व्यवस्था से अलग करना पड़ा।

अतः यह स्पष्ट है कि ‘‘वित्त व्यवस्था का विकेन्द्रीकरण प्रांतीय वित्त व्यवस्था का सूचक होने के बजाय उपरोक्त वर्णित विकेन्द्रीकरण की बहुआयामी प्रक्रिया का सामान्य नाम है, और विकेन्द्रीकरण के एक सूत्र के अध्ययन के लिए शीर्षक के तौर पर उस उक्ति का इस्तेमाल करना जो विकेन्द्रीकरण के तीनों सूत्रों को बताने के लिए उपयुक्त है, परेशानी में डालने के अलावा कुछ नहीं है। अतः इस भ्रम से बचे रहने के लिए कि यह अध्ययन उस दिशा से अलग है जिसकी यह जांच-पड़ताल करना चाहता है। इसे ‘‘ब्रिटिश भारत में प्रांतीय वित्त व्यवस्था का विकास’’ शीर्षक देना उचित समझा गया है। साथ ही ‘‘साम्राज्यवादी वित्त व्यवस्था के प्रांतीय विकेन्द्रीकरण का अध्ययन’’ नाम से उप-शीर्षक भी दिया गया है। यहां ‘‘साम्राज्यवादी’’ और ‘‘प्रांतीय’’ शब्दों को उनकी पूरी महत्ता के साथ पढ़ा जाना चाहिए। वाक्य रचना कितनी भ्रामक हो जाती है, इसे इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि उपरोक्त चर्चित जस्टिस रानाडे के पैम्फलेट (प्रालेख) का शीर्षक ‘‘प्रांतीय वित्त व्यवस्था का विकेन्द्रीकरण’’ है। हालांकि यह प्रांतीय वित्त व्यवस्था के विकास से ही संबंधित है लेकिन अध्येता (विद्यार्थी इसकी अनदेखी कर सकता है क्योंकि इसके शीर्षक से लगता है कि इसकी विषय-वस्तु, स्थानीय वित्त व्यवस्था के विकास से संबंधित है। यदि जस्टिस रानाडे विकेन्द्रीकरण के विभिन्न पहलुओं के बारे में सजग रहते तो संभवतः वह यह अनुमान लगा लेते कि उनके पैम्फलेट (प्रालेख) का शीर्षक सामग्री से मेल नहीं खाता है।