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दूसरी ओर नमक कर ख्1, मोतुर्फा ख्2, तथा अन्य शोशणकारी कर ख्3, गरीब मेहनतकशों को पीडि़त करते रहे। यह सच है कि स्थानीय शासन के तहत प्रचलित अनेक छोटे-मोटे करों को हटा लिया गया था, हालांकि उपलब्ध साक्ष्य बताते हैं कि इस तरह खोए गए राजस्व की पूर्ति भूमिकर जैसे जारी रहने वाले करों को बढ़ा कर की गई। बाद के आरोप को आधिकारिक तौर पर नकारा गया ख्4, लेकिन यह सच है कि गरीबों से उगाहे जाने वाले भूमि करों को ऐसे करों को समाप्त करने के साथ-साथ ही बढ़ाया और संघठित किया गया जिनसे सरकार को लाभ होने के बजाए घाटा ही हुआ।

  1. विभिन्न कालों में नमक राजस्व का कुल राजस्व के साथ औसत निम्न थाःµ

वर्ष औसत वर्ष औसत वर्ष औसत

1792&93 ls 1796&97
1997&98 ls 1801&2
1802&3 ls 1806&7
1807&8 ls 1811&12
1812&13 ls 1816&17
14-13
12-10
11-09
11-14
10-92
1817&18 ls 1821&22
1822&23 ls 1826&27
1827&28 ls 1831&32
1832&33 ls 1836&37
1837&38 ls 1841&42
11-25
11-87
12-03
9-72
12-37
1842&43 ls 1846&47
1847&48 ls 1851&52
1852&53 ls 1855&56
64 o"kZ dk vkSlr C;kSjk
11-65
9-14
9-17
11-07
  1. हैंड्रिक्स, पृ. 283,

  2. 1858 में मद्रास नेटिव एसोसिएशन द्वारा हाउस ऑफ कामन्स को दी गई याचिका में एक ऐसे कर के

बारे में बताया गया है जो व्यापार और बुनकर, बढ़ई, धातुकारों, दुकानदारों एवं पटरी पर बेचने का पेशा

करने वालों पर थोपा गया, कुछ अपने औजारों पर चुंगी देकर कुछ अन्य बेचने की अनुमति लेकर बेचने

वालों, व्यापारियों की छोटी-मोटी वस्तुओं पर भी और कारीगरों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सस्ते

औजारों पर जिसकी कीमतें मोतुर्फा द्वारा अक्सर 6 गुनी बढ़ा दी जाती हैं। रघुवैयंगर द्वारा अपनी पुस्तक

‘‘प्रोग्रेस ऑफ मद्रास प्रेसीडेंसी’’ में उद्धृत, 1893, पृष्ठ 113

  1. अपनी पुस्तक ‘‘जर्नी फ्राम मद्रास’’ के दूसरे भाग में डॉ. फ्रांसिस बुकानन कहते हैं कि दक्षिण भारत में

स्थित कोयम्बतूर के सतीमंगलम में बढि़या कपड़े के दो टुकड़ों पर एक वीरराया फनम की 3/4$1/3

या 5-1/4 की नई स्टाम्प ड्यूटी (स्टाम्प शुल्क) लगाई गई थी और अन्य खुरदरे कपड़े के दो टुकड़ों

पर एक वीरराया फनम की 3$3/4 या लगभग 2-3/4 की थी। परिणामस्वरूप बनुकरों ने पेशा छोड़

दिया और सामूहिक रूप से जिलाधीश के पास गए। प्रत्येक लूम पर लगने वाले 4 या 5 फनम वार्षिक

के स्थान पर यह कर लगाया गया था। बुनकरों द्वारा यह अधिक माना गया (पेज 240)। वह यह भी

कहते हैंµ बुनकरों के 50 घरों वाले दोदारा पल्लयम में बुनकर नए स्टाम्प शुल्क को लेकर काफी

परेशान हैं। उनका कहना है कि अब प्रत्येक लूम के उन्हें 20 फनम देने होंगे जबकि पहले वे 5 फनम

ही देते थे, (वही) पृ. 242

  1. संसदीय लेख, अंक 5, 1831, ईस्ट इंडिया कंपनी की कारगुजारी के साक्ष्य के सारांश, क्यू 3864-66