1 साम्राज्यवादी व्यवस्था : इसका विकास और ह्रास - Page 93

78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सीमा शुल्कों के विनाशकारी प्रभाव का साक्ष्य है। ख्1,

जब ये संसाधन असफल हो गए तो सरकार ने राजस्व प्राप्त करने के कुल अत्यधिक विवादास्पद तरीके अपनाने शुरू कर दिए।

साम्राज्यवादी शासन व्यवस्था के तहत लागू राजस्व व्यवस्था का निष्पक्ष सर्वेक्षण करने पर यह कहने को मजबूर होना पड़ता है कि कर पद्धति में न्याय का तत्त्व विलुप्त था। यह एक क्रूर हास्य था या फिर एक अकर्मण्य सिद्धांत क्योंकि नश्तर उस जगह पर नहीं चुभाया गया था जहां पर खून सबसे अधिक गाढ़ा था बल्कि राजनीतिक शरीर के उस भाग पर चुभाया गया था जो अपनी कमजोरियों और गरीबी के कारण वार झेलने में सबसे अधिक कोमल था। गरीब काश्तकारों की कमाई पर गुलछर्रे उड़ाने वाले और विलासिततापूर्ण जीवन बिताने वाले भू-स्वामी या मोटी तनख्वाहों पर ऐश करने वाले अनेक यूरोपीय नौकरशाहों को सरकारी रख-रखाव के लिए खर्चों में अना योगदान देने की छूट थी, एक ऐसी सरकार के जिसकी मुख्य गतिविधियां चमक-दमक और सुविधाएं बरकरार रखने के लिए केंद्रित थीं।

  1. निम्नलिखित सारणी कुल राजस्व में सीमा-शुल्क के अनुपात को दर्शाती हैµ

वर्ष अनुपात वर्ष अनुपात वर्ष अनुपात

1792&93
ls
1796&97
1797&98
ls
1801&2
1802&3
ls
1806&7
1807&8
ls
1811&12
1812&13
ls
1816&17
2-38
3-10
4-16
5-04
6-68
1817&18
ls
1821&22
1822&23
ls
1826&27
1827&28
ls
1831&32
1832&33
ls
1836&37
1837&38
ls
1841&42
8-32
7-58
8-12
7-19
6-76
1842&43
1846&47
1847&48
ls
1851&52
1852&53
ls
1855&56
64 o"kZ
dk vkSlr
6-02
5-40
5-52
6-22

हैंड्रिक्स, पृ. 286