2. रजत मानक और इसकी सममूल्यता का विस्थापन - Page 107

92 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

प्रतीत हुआ कि जैसे ही इसकी आपूर्ति में कमी आई वैसे ही इसके मूल्य में गिरावट आई। इतिहास के ऐसे तथ्य होते हुए यह विचार किया गया कि उन्होंने उनको कोई सहायता नहीं दी जिन्होंने चांदी के मूल्यापकर्ष के लिए पर्याप्त व्याख्या के रूप में विमुद्रीकरण की अपेक्षा अधिक आपूर्ति पर अपना मामला आधारित किया।

इन छोटी-छोटी बातों को छोड़कर 1873 ख्1, के पूर्व और बाद के बीस वर्षों की विचित्र घटना क्रम के कारण यह मामला काफी छोटा रह गया था। यह कहा गया कि 1848 से प्रारंभ किए गए और वर्ष 1870 के अंत तक अवधि को 1870 के बाद की अवधि से तुलना की जाए तो ऐसा आकर्षित करने वाला तथ्य उभरता है यद्यपि वे दोनों धातुओं के तुलनात्मक मूल्यों के संदर्भ में एक-दूसरे के विपरीत रहे हों कि दोनों अवधियां अपनी तुलनात्मक आपूर्ति में प्रिवर्तनों के संदर्भ में समान रही हों। तुलनात्मक उत्पादन की दृष्टि से 1870 और 1883 के बीच की अवधि चांदी की प्रचुरता से भरपूर है। 1848 और 1870 के बीच की अवधि दो बहुमूल्य धातुओं की तुलनात्मक आपूर्ति के परिवर्तनों के संबंध में ऊपर बताई गई अवधि के ठीक समानान्तर है। केवल इस मामले में सोना ही था जो अपनी मात्रा में बढ़ गया। अब यदि ऐसी अधिक आपूर्ति है जिसने दूसरी अवधि (1870-93) में दोनों धातुओं के मूल्य-संबंधों को शासित किया है तो इसे प्रथम अवधि (1848-70) में उनके मूल्य संबंधों के बारे में सही होना चाहिए। तब तक प्रथम अवधि में दोनों धातुओं के तुलनात्मक मूल्यों और दूसरी अवधि में मूल्यों में कोई उलझन रही? इस बात पर बल दिया गया कि पहली अवधि में दोनों धातुओं के उत्पादन के अनुपातों में दूसरी अवधि के उत्पादन के अनुपात से कहीं अधिक उलझन रही। वास्तव में यदि तुलनात्मक रूप से कहा जाए तो दूसरी अवधि में कुछ भी उलझन नहीं रही जिसके बारे में कुछ कहा जा सकता। फिर भी प्रथम अवधि के दौरान तुलनात्मक मूल्य 1ः5 ½ के अनुपात में काफी स्थिर रहा जबकि दूसरी अवधि में यह अनुपात 16.10 तथा 26.75 के बीच के उतार-चढ़ाव में बना रहा। जिन लोगों ने यह तर्क दिया था कि 1873 के बाद चांदी के मूल्य में गिरावट आई क्योंकि इसकी अधिक आपूर्ति की गई थी वे इस समस्या से घिर गए कि यदि ऐसा था तो सोने के मूल्य में गिरावट क्यों नहीं आई जबकि 1873 से पूर्व सोने की आपूर्ति प्रचुर मात्रा में थी। इसलिए सारा विवाद इस प्रश्न पर केन्द्रित रहा कि इन दो परिस्थितियों में यह अंतर किस प्रकार बना रहा? यदि प्रथम अवधि में सोने के उत्पादन में भीषण वृद्धि ने चांदी के मूल्य को 2 प्रतिशत से अधिक नहीं होने दिया तो ऐसा क्यों हुआ कि दूसरी अवधि में चांदी के तुलनात्मक उत्पादन में अपेक्षाकृत नाममात्र की वृद्धि ने सोने के मूल्य में इतनी

  1. देखिए µएच. एस. फॉक्सवैल, ‘‘बायमेटलिज्म इट्स मीनिंग एंड एम्स (द्विधातुवादः इसका अर्थ और

उद्देश्य)’’ - दि (ऑक्सफोर्ड) इकनॉमिक रिव्यू (1893) खंड- III पृष्ठ 302