128 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
संबंधी सीमाओं को हटा दिया था। मानक उपायों के मूल्य में ऐसी विभिन्नताओं के परिणास्वरूप व्यापार में हड़बड़ी तथा हिचकिचाहट द्वारा वृद्धि हुई और सट्टेबाजी तेजी से सक्रिय हो गई। ख्1,
व्यापार की प्रगति स्थिरता व स्थायित्व पर निर्भर होती है यह एक सच बात है जो बहुत कम लोगों के समझ में आती है जब तक कि इसके तथ्य नकार न दिए हों। जब सरकार स्थिर हो, साख सुरक्षित हो और शर्तें एक समान हों तो स्वस्थ उद्यम के लिए इसके महत्व को समझना कठिन होता है और फिर भी, अस्थिरता की बाधा इतनी बड़ी होती है कि अनिश्चितता से घिरे क्षेत्रों में सर्वत्र व्यापारियों का मार्गदर्शन स्थिरता को उत्पन्न करने वाली अनेक प्रकार की युक्तियों द्वारा किया जाता है। सर्वत्र व्यापार के बैरोमीटर उत्पन्न हो गए हैं, जो व्यापारियों को आसन्न परिवर्तनों के संबंध में पूर्व चेतावनी देते हैं और इस प्रकार उनको अपने कार्य में समय पर परिवर्तन करके उन परिवर्तनों के विरुद्ध तैयारी करने के योग्य बना देते हैं। समूचे बीमा व्यापार का उद्देश्य आर्थिक जीवन को स्थिरता प्रदान करना है। जिस आवश्यकता ने उन मानक मापों को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से स्थापित सरकारों को बाध्य किया, वह आवश्यकता उसी उद्देश्य से प्रेरित थी। इन मानक मापों द्वारा, वस्तुओं की मात्रा का पता लगाया जा सकता है और उनमें व्यापार को निश्चित रूप से नियमित किया जा सकता है जिस अत्यंत सावधानी वाली सूक्ष्मता के द्वारा प्रत्येक सभ्य देश अपनी मानक मापों को परिभाषित करता है और एक विशाल मशीनरी का अनुरक्षण वह उसे विचलन से बचाने के लिए करता है। ये दोनों उस बड़े महत्व के केवल प्रमाण मात्र हैं जो महत्व के आर्थिक समाज अभिव्यक्ति को यथार्थता प्रदान करने के मामले को देता रहता है और अपने सदस्यों द्वारा अपनी निजी या निगमित क्षमता में की गई संविदाओं को पूरा करने के आश्वासन देता रहता है।
चूंकि एक समुदाय की मानक माप समुदाय के अपने लिए महत्वपूर्ण होती है। मूल्य की उसकी माप उन सबमें सबसे महत्वपूर्ण है। ख्2, भार की माप, विस्तार या मात्रा केवल विशेष लेनदेन में होती है। यदि पाउंड, बुशेल या गज को बदल दिया जाएगा तो दोष तुलनात्मक रूप से सीमित रह जाएंगे। परंतु मूल्य की माप सर्वव्यापक होती है।
पील ने यह घोषणा की ख्3,, ‘‘सार्वजनिक या निजी कोई संविदा नहीं है।’’ राष्ट्रीय या व्यक्तिगत स्तर पर ऐसा कोई वादा नहीं है जिस पर इसका प्रभाव नहीं पड़ता
साक्ष्य-इंडियन करेंसी कमेटी, 1898 पृ. 6, 290, 9, 808-10
हैरिस, एन ऐसे अपोन मनी एंड कोयन्स (जे आर मैककुलोक द्वारा अपने काल्यूम ऑफ स्केयर्स ट्रक्टस
ऑन मनी, पार्ट-1, अध्याय-2, भाग-21 भाग-11, अध्याय-11, पैरा 11, 13 तथा 20 में पुनर्मुद्रित। 3. उसका बैंक चार्टर एक्ट पर हाउस ऑफ कामन्स में वाद-विवाद के दौरान, दिनांक 6 मई, 1844 को
दिया गया भाषण । हंसार्ड खंड 34 पृष्ठ 720