रजत मानक तथा इसकी अस्थिरता के दोष
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है। वाणिज्य के उद्यम, व्यापार के लाभ, समाज के समस्त घरेलू सम्बंधों में की गई व्यवस्था, श्रमिकों की मजदूरी, अधिकतम तथा न्यूनतम राशि के आर्थिक सौदे, राष्ट्रीय ऋण का भुगतान, राष्ट्रीय व्यय के लिए प्रावधान, सबसे छोटे मूल्यवर्ग के सिक्कों का नियंत्रण जो जीवन की आवश्यकताओं पर होता है, ये सब मूल्य की माप में परिवर्तन द्वारा प्रभावित होते हैं। ‘‘ऐसा इस कारण होता है क्योंकि प्रत्येक संविदा, यद्यपि वह अंततः माल की संविदा होती है मूलतः मूल्य की संविदा होती है। अतएव भार की माप क्षमता या परिमाण में स्थिरता बनाए रखना पर्याप्त नहीं है। माल की संविदा, अनुबद्ध मापदंड के लिए सही रह सकती है, परन्तु फिर भी मूल्यों के मापदंड में परिवर्तन के कारण मूल्यों में संविदा के रूप में मूल्य के मापदंड में स्थिरता को बनाए रखने की आवश्यकता एक व्यवस्थित समाज की प्रत्येक सरकार के कंधों पर पड़ती है। परन्तु जैसे-जैसे समाज स्थिति से संविदा की ओर अग्रसर होता है इसका महत्व निर्विवाद रूप में बढ़ जाता है तो समाज के संविदात्मक आधार का संरक्षण, मूल्य के एक अपरिवर्तनीय मापदंड के संरक्षण के समान हो जाता है।
यह पता चला कि मूल्य के एक सामान्य मापदंड को किसी एक या दूसरे रूप में पुनः संस्थापित करने के काम को और अधिक लम्बे समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता था क्योंकि मूल्य के मापदंड को नष्ट करने में सत्तर के दशक के विभ्रांत विधायकों ने सहायता की। जैसा कि पहले वर्णन किया गया है इस कानून के बनने के बाद के परिणाम इतने भीषण थे कि स्थिति को बिना ठीक किए कठोर थे उनके फलस्वरूप ऐसी परिस्थिति के बिना काम चल नहीं सकता था। पुनर्निर्माण के प्रयासों को काफी हानि पहुंचने से पहले ही आरंभ कर दिया जाना चाहिए था। यह बात केवल यह दर्शाती है कि व्यापार के बंधन से जुड़ा विश्व यदि हो सका तो, इस बात पर जोर देगा कि उसकी मुद्रा प्रणाली एक समान मापक पर आधारित होनी चाहिए।