विनिमय मानक की स्थिरता
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2]478 25 78 7 5 617 14 98 1]023 1]015 1]360 |
15-039 15-974 15-243 15-350 15-334 15-251 15-242 14-408 13-787 13-870 13-626 |
विनिमय दर को नीचे गिरने से बचाए रखने के लिए आहरण कम करना कोई अधिक लाभप्रद नहीं हुआ क्योंकि होम ट्रेजरी की वित्त व्यवस्था के लिए स्टर्लिंग उधार लेने का जो तरीका अपनाना जरूरी हो गया, वह कम खर्चीला नहीं था। ख्1, रुपया निकालने से प्रेषित रकम 1893-94 में होम ट्रेजरी की कुल संवितरित राशि से 6,588,000 पौंड कम थी। यह घाटा 7,430,000 पौंड का स्थायी स्टर्लिंग ऋण लेकर पूरा किया गया और इस रकम पर ब्याज पहले से ही स्वर्ण भुगतान के भारी बोझ और पड़ गया। इतना भारी दंड या जुर्माना अदा करने की जगह सैक्रेट्री ऑफ स्टेट ने बाजार पर अपना प्रभुत्व बनाए रखने से बेहतर यही समझा कि वह बाजार के पीछे-पीछे चले। परंतु ‘‘जैसा होता है, होने दो’’ की नीति की भी अपनी कीमत अदा करनी पड़ी। विनिमय दर 1 शिलिंग 4 पैंस से भी कम होने के कारण होम ट्रेजरी को जाने वाली रकम पर और बोझ बढ़ गया और भारत सरकार को अपने यूरोपियन सैनिक और गैर-सैनिक अधिकारियों को विनिमय मुआवजा भत्ता देना पड़ा जिसे वह अब तक रोके हुए थी। रुपये के अपने सममूल्य से भी नीचे गिरे जाने की जो लागत भारत सरकार को चुकानी पड़ी वह रकम काफी बड़ी थी। ख्2,
फाउलर कमेटी के सम्मुख सर एच वाटरफील्ड का साक्ष्य, प्रश्न 4332-39
फाउलर कमेटी के सम्मुख माननीय ए आर्थर का साक्ष्य प्रश्न 1806-7