विनिमय मानक की स्थिरता 225
सोने को बाजार में मुक्त रूप से आने देने के कारण, सरकार को इस धातु की कुछ सप्लाई मिली। 18 जुलाई, 1919 से कनाडा में ओटावा स्थित टकसाल में जमा किए गए सोने के सिक्कों या सोने को चालू विनिमय दरों पर तार द्वारा हस्तांतरित करने की सुविधा दी गई और 22 अगस्त, 1919 से न्यूयार्क में प्रतियोगी निविदाओं के आधार पर यह सुविधा दी गई। लन्दन और संयुक्त राज्य अमरीका में सीधे स्वर्ण खरीदने की भी व्यवस्था की गई। अंत में स्वर्ण के निजी आयात को प्रोत्साहन देने के लिए 15 सितम्बर, 1919 से अर्जन दर में तब्दीली की गई ताकि स्टर्लिंग के ”ास को ध्यान में रखा जा सके। परन्तु इस तरह जो सोना मिला, वह नगण्य मात्रा में था और फिर सोने के सिक्के जारी करने से भी उस उद्देश्य की प्राप्ति नहीं हुई जो सरकार के मन में थाµ कि ये सिक्के प्रचलन में बने रहें। जिस तरह की स्थिति बनी हुई थी, उसमें यह असम्भव था। स्वर्ण की तुलना में रुपये के मूल्य का भारी ”ास हो गया। फलतः चालू विनिमय की दर पर सरकार जैसे ही स्वर्ण के सिक्के जारी करती बाजार में आने के साथ ही गायब हो जाते थे। इसलिए सरकार केवल यही कर सकी कि सोने और चांदी के सिक्कों का उपयोग मुद्रा के अतिरिक्त अन्य किसी भी ढंग से उपयोग करने पर पाबंदी लगा दी गई और उनका निर्यात भी बंद कर दिया गया। ऐसा सरकार ने 29 जून और 3 सितम्बर, 1917 की अधिसूचनाओं द्वारा किया। सरकार जब यह समझ गई कि वह स्वर्ण पर निर्भर नहीं रह सकती तो उसने रुपये के सिक्के जारी करने के प्रयास तेज कर दिए। रुपए की धातु की खरीद सुविधाजनक बनाने के लिए 3 सितम्बर, 1917 से निजी ढंग से चांदी का आयात बन्द कर दिया गया। तथापि इस कदम से थोड़े से ही छोटे-मोटे प्रतियोगी रास्ते से हटे और दुनिया में चांदी की मांग इतनी अधिक थी कि सैक्रेटरी ऑफ स्टेट को पर्याप्त मात्रा में चांदी मिली ही नहीं यद्यपि चांदी की बहुत बचत छोटे सिक्कों में चांदी की जगह निकल ख्1, का उपयोग सहायक रूप में किया गया और एक रुपये ख्2, तथा रु. 2.8 ख्3, के नोट भी जारी किए गए। संयुक्त राज्य अमरीका की सरकार से भी यह अनुरोध किया गया कि उसके रिजर्व में पड़े चांदी के डालरों का एक भाग मुक्त कर दिया जाए। अमरीकी सरकार इस बात से सहमत हो गई और उसने पिटमैन एकट पास किया जिसके अंतर्गत भारत सरकार ने 101 ½ सेंट प्रति औंस की दर से पर्याप्त मात्रा में चांदी प्राप्त कर ली। इस अवधि में जो कुल चांदी प्राप्त की गई, उसका विवरण इस प्रकार हैःµ
1918 का एकट IV और 1919 का एक्ट XXI-I
पहली बार 1 दिसम्बर, 1917 को जारी किए गए।
पहली बार 2 जनवरी, 1918 से प्रचलन में आए।