6. विनिमय मानक की स्थिरता - Page 253

238 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इस रिजर्व के नष्ट होने की दशा में, उसकी जगह और रिजर्व की पूर्ति की जाएगी। ख्1, इन अन्तरों के अतिरिक्त भी क्या गोल्ड स्टैंडर्ड रिजर्व पर्याप्त रिजर्व है? सरकारी प्रकाशनों में गोल्ड स्टैंडर्ड रिजर्व के विस्तार के जो आंकड़े दिये जाते हैं, उनका कोई मतलब नहीं होता। परिसम्पत्तियां दिखाने का तब तक क्या लाभ जब तक कि उसके साथ दायित्व न दिखाए जाएं। उक्त रिजर्व की पर्याप्तता के बारे में किसी निर्णय पर पहुंचते समय हमें यह जरूर पता होना चाहिए कि कुल कितने रुपये प्रचलन में हैं। तथापि जब हम प्रचलन में रुपयों की तुलना रिजर्व से करते हैं, तो वह अनुपात इतना पर्याप्त बड़ा नहीं लगता कि इस प्रणाली की स्थिरता के बारे में विश्वास पैदा हो। (देखिए तालिका XLIX )

जब रिजर्ब इतना कम हो तो भला परिचालन बन्द करने की प्रक्रिया को हम पर्याप्त सीमा तक कैसे ले जा सकते हैं? ऐसा सदैव नहीं किया जा सकता, इसका प्रर्याप्त प्रमाण 1920 के संकट से मिल जाता है। परन्तु विनिमय मानक के समर्थकों का यह कहना है कि रिजर्व कम होने का कोई अंतर नहीं पड़ता क्योंकि रिजर्व केवल विदेशों में प्रेषण करने या भेजने के ही काम आता है। यह कहा जाता है कि इस प्रकार की स्थिति में रिजर्व का बड़ा होना जरूरी नहीं होता। यदि इस बात को मान लिया जाए कि रिजर्व का आकार किन बातों पर निर्भर करना चाहिए ताकि वह किसी भी स्थिति में और प्रत्येक स्थिति में प्रर्याप्त सिद्ध हो? इस बारे में मार्गदर्शक नियम बनाने की एकमात्र चेष्टा केवल प्रो. केन्स ख्2, ने की है। उस नियम को भारत के व्यापार संतुलन के सम्भावित फेर-बदल में पाते हैं। अब इससे क्या रिजर्व के नियमन की समस्या को अधिक निश्चित रूप मिल जाता है? जैसा कि पहले बताया जा चुका है, प्रतिकूल व्यापार संतुलन मुद्रा के मूल्य ”ास के कारण हो सकता है। इससे मि. केन्स का कथन कुछ इस प्रकार का हो जाता हैµ रिजर्व मूल्य-”ास की मात्रा के

  1. इंडियन पेपर करेंसी (टेम्परेरी अमेंडमेंट) बिल दिनांक 17 मार्च, 1920 पर बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा

थाµ ‘‘व्यावहारिक दृष्टि से यह वांछनीय होगा कि गोल्ड स्टैंडर्ड रिजर्व को तब तक के लिए छोड़

दिया जाए जब तक कि कागजी मुद्रा रिजर्व का पुनः हस्तांतरण न कर दिया जाए, यदिµ भारत सचिव

अपने भारी घरेलू दायित्वों के कारण अपने पास कौंसिल के रूप में फंड रखना असंभव समझें तब वह

गोल्ड स्टैंडर्ड रिजर्व का उपयोग कर सकेगा और हम उसे गोल्ड स्टैंडर्ड रिजर्व में जमा कर सकेंगे। एक

तीसरी बात भी है और मुझे लगता है कि यह निष्कर्ष के रूप में है। जब आप कागजी मुद्रा रिजर्व के

बदले में कुछ करते हैं, तो आपको कागजी मुद्रा रिजर्व के अंतर्गत ही काम करना पड़ता है_ जब आप

गोल्ड स्टैंडर्ड रिजर्व के बदले में कुछ करते हैं, तो वह लुप्त हो जाता है, वह पिघल जाता है और यह

हमारा दायित्व नहीं होता कि हम उसे लौटा दें_ परन्तु कागजी मुद्रा रिजर्व को लौटाने के लिए तो हम

कानूनन दायित्व से बंधे हुए हैं। एस.एल.सी.पी. खण्ड LVILL पृष्ठ 1416

  1. देखिए ओ.पी. सिट संदर्भ, पृष्ठ 166-7