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विनिमय मानक की स्थिरता 237

की ओर से कोई संतोषजनक कारण नहीं दिया गया। ख्2, परन्तु यदि हम यह कहें कि यह रोकड़ शेष संचय करने का उद्देश्य एक दूसरा गोल्ड रिजर्व बनाना है जो वास्तविक गोल्ड स्टैंडर्ड रिजर्व का पूरक हो, तो हम शायद बहुत गलत नहीं होंगे। इस आकस्मिक साधन से सरकार वर्तमान में चाहे कुछ अधिकार प्राप्त कर ले, यह स्पष्ट है कि वह स्थायी नहीं होगी। सरकार के वित्त का नियंत्रण जब लोकप्रिय हाथों में होगा, तो रोकड़ शेष इतना न्यूनतम रखना होगा जो खजाने के कार्य करने के लिए जरूरी हो और गोल्ड स्टैंडर्ड रिजर्व ही ऐसा रिजर्व होगा जिस पर सरकार को निर्भर रहना पड़ेगा।

रुपये के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड रिजर्व का वही स्थान है जो नोटों के लिए कागजी मुद्रा रिजर्व का है। दोनों का अभिप्राय यही है कि वे अपनी-अपनी मुद्राओं को सहारा दें और उन्हें गिरने न दें या वे बट्टे पर न मिलने लगें। परन्तु सरकार ने रिजर्व के संदर्भ में रुपये और कागजी मुद्रा के प्रति जैसा व्यवहार रखा है, उसमें पर्याप्त विरोधाभास नजर आता है। कागजी मुद्रा के मामले में, जैसा कि ऊपर भी कहा गया है, जो रिजर्व होता है, वह अनुविहित होता है और जब भारतीय कागजी मुद्रा का पूरा मूल आधार ही बदल दिया गया है, तब भी रिजर्व संबंधी उपबंध अभी भी कड़े हैं और बिना कानून तोड़े सरकार उनकी अनदेखी नहीं कर सकती। आजकल भी रुपया महज चांदी पर छपे नोट की तरह ही तो है। ख्1, इसलिए रिजर्व संबंधी उपबंध भी होने चाहिए जो कगजी मुद्रा के बारे में होते हैं। तथापि यह बात बड़ी अजीब लगती है कि स्वर्ण मानक रिजर्व के बारे में कोई भी नियमन न होना सबकी आंखों में खटकता है। ख्2, न केवल सरकार के लिए यह आवश्यक है कि वह रुपये को छुड़ा ले परन्तु ऐसा भी लगता है कि सरकार रिजर्व रखने तक के लिए बाध्य नहीं है। और यदि इसने कोई ऐसा रिजर्व रखा हुआ है तो भी इस बात का कोई आश्वासन नहीं है कि

  1. वास्तव में हमने रुपया मुद्रा का स्तर घटा कर टोकन या प्रतीक मुद्रा का कर दिया है और व्यवहारतः

अब हम ऐसे बैंकरों की स्थिति में आ गए हैं जिन्होंने एक निश्चित मात्रा में फिडुशियरी नोट जारी कर

रखे हैं (इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कागज के हैं या धातु के)_ और उस फिडुशियरी मुद्रा का

मूल्य बनाए रखने के लिए हमारे लिए यह बंधनकारी है कि जब व्यापार की वाजिब आवश्यकताओं के

लिए जरूरी हो तो हम उसे सोने में बदलने की स्थिति में हों। (1603.4 के वित्तीय वक्तव्य में पृष्ठ

14 पर दिया गया कथन)।

  1. चैम्बरलेन कमीशन ने कहाµ ‘‘संकट के समय सरकार की आजादी पर प्रतिबंध लगाने की अपनी हानियां

हैं और यह अवांछनीय है कि रिजर्व की मात्रा और उसकी प्रवृत्ति रूढि़बद्ध या घिसी-पिटी होµ इसलिए

हम यह नहीं समझते कि गोलड स्टैंडर्ड रिजर्व का नियमन किसी कानून के द्वारा हो।’’