6. विनिमय मानक की स्थिरता - Page 255

240 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हिसाब से बदले जाने चाहिए।

परंतु सरकार यह कैसे करे? केवल मूल्य स्तर के उतार-चढ़ाव पर ध्यान देकर। परंतु मुद्रा व्यवस्था करते समय भारत सरकार कीमतों की समस्या पर कभी भी ध्यान नहीं देती। जैसा कि ऊपर बताया गया है, असल में या विनिमय के गिरावट के कारणों की संकल्पना, एक मात्र सही संकल्पना से बिल्कुल भिन्न है। केवल उसी पर अच्छी पकड़ होने पर संकट पर काबू पाया जा सकता है। सही संकल्पना की जानकारी न होने के कारण यह तब तक आंख मूंद कर मुद्रा जारी करती जाती है जब तक कि व्यापार संतुलन प्रतिकूल न हो जाए। इसका एकमात्र उद्देश्य यह है कि गोल्ड रिजर्व बनाए रखा जाए_ और जब तक इसके पास वह रिजर्व है, वह यह कभी नहीं सोचती कि वह कितनी मुद्रा जारी कर रही है। चूंकि जारी मुद्रा और रिजर्व में सहसम्बन्ध नहीं होता, इसलिए जहां तक विनिमय की स्थिरता रिजर्व पर निर्भर करती है, सह सदैव अस्पष्ट ही रहेगी और इस प्रणाली के प्रति विश्वास पैदा होने में समस्या हमेशा बनी रहेगी। बल्कि विदेश प्रेषण के प्रतिदान का दायित्व जो बहुत छोटा लगता है, वह इतना अधिक अनिश्चित हो जाएगा कि विनिमय मानक की स्थिरता को पुनः बनाए रखने की सारी बात ही खतरे में पड़ जाएगी।

परंतु क्या मुद्रा का मूल्य बनाए रखने के लिए स्वर्ण रिजर्व इतना महत्वपूर्ण होता है? कहा जाता है कि विनिमय मानक के सभी समर्थक इस सिद्धांत में विश्वास करते हैं। परंतु यह विचार किसी भी आलोचना का उत्तर देने में सक्षम नहीं हैं। यह समझना कि स्वर्ण रिजर्व इस बात का कारण है कि सभी प्रकार का धन सोने के समतुल्य रहता है, पूरी तरह भ्रामक है। ख्1, ऐसा विचार करना तो सामान्य सी बात को उल्टा कर के देखने के समान है। स्वर्ण रिजर्व के कारण प्रचलन की मुद्रा का मूल्य स्थिर नहीं रहता बल्कि यह तो उसके कुल परिमाण के सीमित होने के कारण होता है जिससे न केवल इसका अपना मूल्य स्थिर रहता है अपितु इससे यह भी संभव हो जाता है कि देश में जितना भी स्वर्ण रिजर्व है, उसे संचित रखा जा सके और उसे सुरक्षित रखा जा सके। मुद्रा के परिमाण की सीमा हटा दीजिए, तब न केवल यह अपना मूल्य बनाए रखने में असफल हो जाएगा अपितु जो भी स्वर्ण रिजर्व है, उसका संचित होना भी रुक जाएगा। किसी मुद्रा का मूल्य सुरक्षित रखने में स्वर्ण रिजर्व का महत्व इतना कम है कि यदि उसके जारी करने पर कड़ी पाबंदी लगा दी जाए तो हम पूरी तरह स्वर्ण रिजर्व समाप्त कर के भी काम चला सकेंगे और मुद्रा के मूल्य

  1. इस संदर्भ में देखिए एफ.ए. फैटर द्वारा विद्वत्तापूर्ण प्रबंध ‘‘दी गोल्ड रिजर्वः इट्स फंक्शन्स एंड इट्स

मेनटेनेंस’’ जोद ‘‘पॉलिटिकल साईंस क्वार्टरली’’ 1896 खंड XI नं. 2 में छपा था।