विनिमय मानक की स्थिरता
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रिजर्व के मूल स्रोत को देखते हुए दोनों मांगे परस्पर विरोधी हैं। यदि रिजर्व अधिक होना चाहिए तो उसका निवेश किया जाना चाहिए। वास्तव में यदि रिजर्व का निवेश नहीं किया गया होता, तो बहुत ही कम रह जाता। ख्1, परंतु क्या इस प्रकार के रिजर्व में कोई खतरा नहीं होता?
वास्तव में इस प्रकार के रिजर्व के खतरे को जेवन्स ने भांप लिया था। उसने कहा था ख्2, µ
‘‘.......... अच्छी सरकार के निधि और अच्छे बिल सदैव किसी कीमत पर बेचे जा सकते हैं ताकि इस प्रकार की मजबूत रिजर्व वाली एक बैंकिंग फर्म हमेशा अपनी ऋण शोधन क्षमता बनाए रख सकती है। परन्तु समाज के लिए निदान रोग से भी बुरा हो सकता है और विवश हो कर रिजर्व बेचने से मुद्रा बाजार में एक ऐसी उथल-पुथल हो जाएगी कि वह भुगतान को निलम्बित कर देने से भी अधिक हानिकारक सिद्ध होगीµ’’
इसी तरह यह कौन कह सकता है कि ब्याज से रिजर्व में होने वाली बढ़ोतरी विनिमय संकट काल में सिक्यूरिटिज को स्वर्ण में परिवर्तित करने के फलस्वरूप सिक्यूरिटिज की कीमतों में मंदी आने से मटियामेट नहीं हो जाएगी? मान लीजिए कि सिक्यूरिटिज का पूरा मूल्य प्राप्त हो जाता है, तो प्रतिशत का मौका आने पर रिजर्व कितना रुपया लगाएगा वह इस बात पर निर्भर होगा कि किस कीमत पर रुपये वापस
खरीदे जाएंगे। यदि रुपये में गिरावट कम है, तो मुद्रा को बड़ी मात्रा में बंद किया जा सकता है और इस तरह उसका मूल्य पुनर्स्थापित किया जा सकता है। दूसरी ओर यदि गिरावट अधिक है तो मुद्रा के थोड़े भाग को बंद करना पर्याप्त होगा और हो सकता है कि उससे रुपये का मूल्य पुनर्स्थापित न हो जैसा कि 1920 में हुआ था जिससे कि एक बड़ा रिजर्व भी नितांत अपर्याप्त सिद्ध होगा। परंतु इस विचार के अतिरिक्त कि अपेक्षाकृत कितना बड़ा रिजर्व बनाया जा सकता है, यहां जो मुद्रा को अनदेखा कर दिया गया है वह यह है कि रिजर्व बनाने की प्रक्रिया में सीधे ही मुद्रा की मात्रा बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती है। चैम्बरलेन कमीशन इस बात को जानता था कि स्वर्ण मानक रिजर्व तब तक नहीं बनाया जा सकता जब तक कि रुपये के सिक्के न ढाले जाएं। वास्तव में इसने इस बात के प्रति सावधान किया था कि स्वर्ण मुद्रा के इच्छुक लोगों को यह याद रखना चाहिए कि यदि स्वर्ण ने नए रुपयों का स्थान
- 1900-1 से 1920-21 के बीच गोल्ड स्टैंडर्ड रिजर्व में डाला गया ढलाई का लाभ केवल 28,573,606
पौंड था, जबकि उसी अवधि में ब्याज और बट्टे से 13,304,847 पौंड मिले जो सिक्का ढलाई से
होने वाले लाभ का लगभग आधा था। तुलना करेंः ईस्ट इंडियाः एकाउंट्स एंड ऐस्टीमेट्स 1921-22
सी.एम.डी.1921का 1517 पृष्ठ 20
- मनी पृष्ठ 227