258 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
यदि वास्तविक विनिमय दरों की व्याख्या क्रयशक्ति समता के सिद्धांत के अनुसार की जाए, तो इस प्रश्न का उत्तर ‘हां’ में देना पड़ सकता है। क्योंकि यह तर्क दिया जा सकता है कि यदि रुपये का स्वर्ण मूल्य बरकरार रहा था तो इसका कारण यह था कि रुपये की कीमतें और स्वर्ण की कीमतें बराबर थी। ख्1, यह कहा जा सकता है कि विनिमय मान का उद्देश्य इतना ही और वह उसने करके दिखा दिया। यह तथ्य स्वर्ण मान का रिजर्व कभी कम नहीं हुआ, इस बात का प्रमाण है कि भारत में भी कीमतों का सामान्य स्तर वही है जो भारत के बाहर था। ऐसी धारणाओं के आधार पर तो यह कहा जा सकता है कि विनिमय मान स्वर्ण मान जितना अच्छा होता है।
यह प्रश्न पूछा जा सकता है कि यदि भारतीय कीमतें स्वर्ण की कीमतों से अधिक ऊंची नहीं थीं तो उन्हें इतना ऊंचा क्यों रखा गया और क्या यह अच्छा न होता कि भारतीय कीमतों को निचले स्तर पर रखा जाता। परन्तु हम यह प्रश्न नहीं उठाएंगे। यदि भारतीय कीमतें केवल स्वर्ण की कीमतों जितना ऊंची थीं, तो हम इस बात से संतुष्ट हो जाएंगे। अब क्या भारतीय कीमतों में केवल स्वर्ण की कीमतों जितनी वृद्धि हुई थी? संलग्न चार्ट को देखने से इस अद्भुत तथ्य का पता चलता है कि भारत में कीमतें न केवल स्वर्ण की कीमतों जितनी बढ़ीं, बल्कि स्वर्ण की कीमतों से भी ज्यादा बढ़ीं। यह ठीक है कि विनिमय मान की प्रभावकारिता की जांच करने के लिए भारतीय कीमतों की स्वर्ण की कीमतों से तुलना करते समय यह जरूरी है कि युद्ध की अवधि को ध्यान में न लिया जाए क्योंकि अधिकांश देशों ने स्वर्ण को मूल्य का स्टैंडर्ड मानना बंद कर दिया था। और यदि हम इस अवधि के अपने हिसाब में शामिल कर भी लें, तब भी इसका हमारे निष्कर्ष पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि यद्यपि भारत कोई युद्धरत देश नहीं था, तब भी भारत में कीमतें उन देशों से बहुत कम नहीं थीं जहां युद्धकाल में बहुत अधिक मुद्रा प्रसार हुआ था और एक थोड़ी-सी अवधि को छोड़ कर वे संयुक्त राष्ट्र अमरीका की स्वर्ण कीमतों से निश्चय ही अधिक थीं।
अब यह स्पष्ट है कि वास्तविक तथ्य हमारी विनिमय मान के पक्ष वाली पूर्व धारणाओं के अनुरूप नहीं है। भारत में कीमतों में स्थानीय वृद्धि, इंग्लैंड की कीमतों के सामान्य स्तर के मुकाबले अधिक थी, इतना स्पष्ट दृष्टिगोचर होता था कि प्रो.
- तथापि यहां यह नोट करना चाहिए कि न तो प्रो. केन्स ने और न ही प्रो. केमेरेर ने एक्सचेंज स्टैंडर्ड के
पक्ष में इस किस्म का कोई दावा किया था। यदि उन्होंने कुछ कहा था तो दोनों ने ही इस धारणा के
विरूद्ध तर्क दिया था कि सभी कीमतों में समानता हो सकती है।