प्राक्कथन- प्रोफेसर ऐडविन केनन - Page 28

प्रोफेसर ऐडविन केनन 13

बढ़ने देना नहीं चाहते थे सहायता प्राप्त थी, ने गोरे लोगों को सोने की खानों के उत्पाद में आने वाले भार को अपने ऊपर ओढ़ लिया। जिस प्रकार से संयुक्त राज्य चांदी खरीद कर उसकी कीमत को स्थिर नहीं रख सका, इसी तरह वे सोने की कीमत को अंततः स्थिर नहीं रख सका। उच्च प्राधिकारियों की सलाह के बावजूद सोने की कीमत को बनाए नहीं रख सकेंगे। लेकिन इसकी बिल्कुल संभावना नहीं है कि यूरोप की केन्द्रीय बैंकों की मांग उसकी रक्षा नहीं कर सकेगी। अनुभव से यह शिक्षा मिलनी चाहिए कि फाइनेंसर्स के दृढ़ रिजर्व के बावजूद चांदी की मुद्रा कम नहीं हो सकी। यह इसलिए हुआ कि चांदी की मुद्रा के लिए कागज नहीं था। पूर्ण रूप से सोने के सिक्कों में बदले जाने, पिघलाए जाने और निर्यात होने पर भी यह सिद्धांत तथा व्यावहारिक रूप से सिद्ध हो गया है कि सोने का थोड़ा-सा भंडार भी पूर्ण रूप से आंतरिक और अंतर्राष्ट्रीय मांग की पूर्ति कर सकता है। बैंक की अपेक्षा, व्यक्तियों द्वारा अधिक मांग की संभावना है। यह विचारणीय है कि कुछ देश जिन्होंने कागजी मुद्रा को हास्यास्पद होने की स्थिति तक कम कर दिया है। वे कागज लेने से इंकार कर सकते हैं और सोने के सिक्कों की मांग कर सकते हैं। लेकिन इसकी अधिक संभावना है कि वे वर्तमान कागज के स्थान पर बढि़या कागज की मुद्रा स्वीकार कर अधिक प्रसन्न होंगे और धातु के सिक्कों के लिए जिद नहीं करेंगे। कुल मिलाकर निश्चित रूप से ऐसा लगता है कि यूरोप और यूरोप के अधीन देशों में युद्ध से पहले पहल की। सोने की मांग की अपेक्षा कम होगी। यह बढ़ेगी भी तो बहुत धीरे-धीरे या बिल्कुल नहीं बढ़ेगी।

इस प्रकार कुल मिलाकर यह भय है कि सोने की कीमत कम हो जाएगी और इसके विपरीत दूसरी चीजों के भाव गिर जाएंगे। इसका स्पष्ट इलाज यह है कि अंतर्राष्ट्रीय समझौते के अंतर्गत इसके उत्पादन पर प्रतिबंध लगा दिया जाए और संसार के संसाधनों को खानों में आगे आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित कर दिया जाए। दूसरा उपाय यह है कि एक अंतर्राष्ट्रीय आयोग के द्वारा कागजी मुद्रा बांट दी जाए और उसकी राशि को विनियमित कर दिया जाए ताकि इसके भाव स्थिर रह सके। यह सुझाव कालेज में प्रोफेसर द्वारा पढ़ाए जाने के लिए ठीक हैं। लेकिन व्यावहारिक राजनीति के संदर्भ में न आज और न निकट भविष्य में व्यवहार्य हैं। कठिनाई के बावजूद एक व्यावहारिक मार्ग है पूर्व के देशों में सोने की मुद्रा लागू कर दी जाए अगर ये देश सोने के उत्पादन का अधिकांश भाग को आने वाले वर्षों में से लें। इससे हमें उस समय तक राहत मिल जाएगी जब तक कि उतने संसाधन उपलब्ध थे जितने संसाधन हो जिनका पता न लग जाए। इसके बाद या तो हम बिना परिवर्तन किए कार्य करते रहेंगे या नई व्यवस्था का पता लगा लेंगे। यह तर्क उन लोगों को पसंद नहीं आएगा जो सिर्फ बढ़ती कीमतों से होने वाले लाभ भर की सोचते हैं, लेकिन यह उन लोगों को अवश्य भाएगा जो अधिकांश जनसंख्या जो अतिरिक्त लाभ कमाने वाले लोगों की भावना के कारण उत्पीडि़त होते हैं। अंततोगत्वा मानव जाति के लिए स्थिरता ही सर्वश्रेष्ठ है।

-ऐडविन केनन