स्वर्ण मानक की ओर वापसी
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बंद होने के बाद भारत सचिव को निर्माण का पूर्ण अधिकार मिल गया है, तब वह रुपया सबसे ऊंची बोली देनेवाले को अब भी बेचता रहे। यह जोर देकर कहा जाता पैंस या 1 शि. 4है कि अपनी एकाधिकार वाली स्थिति का लाभ उठाते हुए उसे ये बिल 1 शि. 4 3/32 पैंस पर नहीं बेचने चाहिए क्योंकि 15 रुपये प्रति सॉवरेन की 1/8 दर से यह भारत के लिए स्वर्ण आयात करने का अंक बैठता है। व्यवहार में भारत सचिव ने अपनी इस स्थिति का लाभ नहीं उठाया है और स्वर्ण आयात करने के अंक से नीचे की दरों के टेंडर स्वीकार कर लिए हैं। जैसा कि उसके द्वारा बिलों को स्वीकार करने की न्यूनतम दरों से पता चलता है।
यह कहा जाता है कि यदि कौंसिल बिलों की बिक्री करते समय इस बात पर कड़ी नजर रखती कि उतने ही कौंसिल बिल बेचे जाएं जितने होम ट्रेजरी के लिए जरी हैं और यदि वह स्वर्ण आयात करने के अंक से कम कीमतों पर न बेचे जाते तो उससे भारत में स्वर्ण का आयात होने लगता और वह भारतीय मुद्रा माध्यम का एक भाग बन जाता। ऐसी स्थिति में भारत सचिव के कदम से भारतीय सोना लन्दन में बंद हो जाता है। यहां हमें इस बात से कोई अभिप्राय नहीं कि लन्दन में भारतीय सोने का उपयोग होता है या दुरुपयोग। परन्तु जो लोग इंडिया ऑफिस द्वारा भारतीय निधियों के प्रबंध में होने वाले कलंकित कारनामों को न्यायोचित ठहराना चाहते हैं और उन्हें वैज्ञानिक आधार देने के लिए अपनी सेवाएं प्रस्तुत कर रहे हैं, उन्हें यह बात याद दिलाई जा सकती है कि डाउनिंग स्ट्रीट के एक तरफ चलने वाली इस कार्रवाई को, जिसे बागेहॉट के शब्दों में यदि दूसरी तरफ भी चलाया गया तो उसकी जोरदार आलोचना अवश्य होगी। उसे सही सिद्ध करने के लिए उन्होंने जो कुछ कहा है, उससे और ज्यादा चालाकी की जरूरत होगी। ऐसा लगता है कि यह बात दोनों तरफ स्वीकार कर ली गई है कि भारत सचिव के कार्यकलापों से भारत में स्वर्ण का आयात रूकता ही पूरी तरह तो नहीं, पर उतना जरूर जितना इन कार्यकलापों के अंतर्गत आता है। अब जो लोग यह कहते हैं कि फाउलर कमेटी के आदर्शों को बिल्कुल छोड़ दिया गया है, निस्सन्देह उनका विचार ठीक है कि भारत सचिव की कार्रवाई को सीमित कर देने से भारत में स्वर्ण का आयात होने लगेगा। परन्तु इस बात को मानक का क्या औचित्य है कि आयातित स्वर्ण भारत में मुद्रा का एक भाग बन जाएगा? यह मान लेना कि भारत सचिव की वित्तीय कार्रवाइयां बन्द कर देने से स्वर्ण स्वतः ही भारत की मुद्रा बन जाएगा, बहुत ही दरियादिली की बात कही जाएगी। आयातित स्वर्ण भारतीय मुद्रा का भाग बनेगा या नहीं, बिल्कुल भिन्न परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
फाउलर कमेटी के आदर्श पूरे न हो पाने का एक और कारण बताया जाता है, भारत में ऐसी टकसाल का न खोला जाना जहां सोने को मुक्त रूप से सिक्कों में