278 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
ढाला जाता हो। फाउलर कमेटी की सबसे महत्त्वपूर्ण सिफारिश यह थी कि ऐसी टकसालें खोली जाएं जहां सोने को मुफत रूप से सिक्कों में ढाला जाए। यहां तक कहा गया है कि फाउलर कमेटी के आदर्शों पर पानी फेरने के लिए सरकार द्व ारा इन सिफारिशों को कार्यान्वित करने की गलती जिम्मेदार है। स्वर्ण के समर्थक सदैव ही इस बात पर रोष प्रगट करते हैं कि ट्रेजरी के उग्र व्यवहार के कारण ही सरकार ने 1900 में प्रस्ताव को त्याग देने पर अपनी सहमति दे दी थी। सन् 1911 में सर वी थैकरसे ने सुप्रीम लैजिस्लेटिव कौंसिल में एक प्रस्ताव पेश किया था जिसमें सरकार से अनुरोध किया गया था कि यदि ट्रेजरी सहमति दे दे, तो वह सॉवरेन ढालने के लिए स्वर्ण टकसाल खोलने की वांछनीयता पर चिर करें, और यदि ऐसा नहीं हो सकता तो, वह सोने का अन्य सिक्का ढालने पर विचार करें। कौंसिल की एक स्वर ने उठाई गई इस आवाज को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने भारत सचिव से पुनः आग्रह किया कि वह ट्रेजरी से इसे स्वीकृति देने को कहे। ख्1, इस मौके पर ट्रेजरी ने भारत सचिव ख्2, के सामने दो विकल्प रखेµ (1) रॉयल मिंट (शाही टकसालों की भारत में एक शाखा केवल सोने के सॉवरेन ढालने के लिए खोले जो पूरी तरह इसके नियंत्रण में हो_ अथवा (2) बम्बई की टकसाल का नियंत्रण पूरी तरह इसे हस्तांतरित कर दिया जाए। भारत सरकार को इन दोनों में से कोई विकल्प स्वीकार्य नहीं था_ और भारतीय भावनाओं का आदर करते हुए भारत सचिव ने भारतीय टकसाल से दस रुपये का स्वर्ण का सिक्का ढालने की अनुमति दे दी। भारत सरकार ने इस हल को ट्रेजरी के सुझाव से बेहतर समझा परन्तु यह इच्छा प्रगट की कि चैम्बरलेन कमीशन जो उस समय काम कर रहा था, इस पर नए सिरे से विचार करे। कमीशन ने स्वर्ण टकसाल खोलने की अनुमति तो नहीं दी परन्तु उसकी स्थापना में उसे कोई आपत्ति नहीं दिखाई दी बशर्तें कि वह केवल सॉवरेन का सिक्का जारी करे, और भारतीय जनमत चाहे कि वह सिक्का ढाला जाए और भारत सरकार सिक्का ढालने का व्यय उठाने को तैयार हो। ख्3, कमीशन के इस विचार के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ा और स्थिति वही हो गई जो 1900 में थी। बाद में युद्ध शुरू होने के कारण सरकार को विवश होकर रॉयल मिन्ट की एक शाखा के रूप में सोने के सिक्के ढालने के लिए बम्बई टकसाल खोलनी पड़ी। परन्तु 1919 में इसे फिर बन्द कर दिया गया। 1919 के
देखें कॉमन्स पेपर 495, 1913 का_ पृष्ठ 57
वही, पृष्ठ 64
रिपोर्ट, धारा 69-71