300 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
रहा था। इसलिए यह बात असंदिग्ध है कि टकसालें बंद करने से प्रभावकारी रूप से सीमा लग गई थी, और इस बात को कमेटी ने भी स्वीकार कर लिया। ख्1, परंतु मान लीजिए कि टकसालें बंद करने से प्रचलन में रुपयों की मात्रा पर प्रभावकारी ढंग से सीमा नहीं लगती, तब क्या उपाय हो सकता था? तब क्या स्वर्ण रिजर्व की योजना से विदेशी भुगतान के लिए परिवर्तनीयता सुनिश्चित करके इस उद्देश्य की प्राप्ति हो सकती, उस दशा में जब कि स्वर्ण रिजर्व को रुपये के अधिक सिक्के ढाल कर प्राप्त किया जा सकता था? यदि रुपयों पर सीमा लगा कर उनका मूल्य बनाए रखा जा सकता है, जैसा कि शिलिंग के मूल्य की दशा में हुआ, तब क्या स्वर्ण रिजर्व बनाने क लिए रुपये के सिक्कों की मात्रा में बढ़ोतरी करने की अनुमति देने से, उनकी सीमा बंध जाती जबकि कमेटी को यह अंदेशा था कि यदि रुपयों की संख्या फालतू नहीं थी, तब भी उसकी प्रचुरता जरूरी थी?
फाउलर कमेटी की रिपोर्ट पढ़ते समय क्षोभ हुए बिना नहीं रह सकता। रुपये बनाने की अनुमति देना हर प्रकार से शरारतपूर्ण था यह सच्चे स्वर्णमान का विनाश करने वाला था_ मुद्रा की तंगी होने पर राहत दिलाने के लिए इसकी जरूरत नहीं थी और यह निश्चित रूप से रुपये का मूल्य घटाने वाली थी। यदि यह स्वर्णमान और मुद्रा की उत्सुक थी, जो यह सचमुच थी भी, तो इसे रुपये के सिक्के बनाना कतई बंद कर देना चाहिए था और उस अधिसूचना को दबा देना चाहिए था जिसमें सरकार को सोने के बदले रुपये देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ऐसा न कर सकने के कारण, इसने न केवल देश को एक मजबूत प्रणाली से वंचित कर दिया बल्कि वास्तव में तो अनजाने में इसने कागजी मुद्रा सहित समूची भारतीय मुद्रा को एक अपरिवर्तनीय रुपये के आधार पर रख दिया। हर्शल कमेटी ने जो एक घातक उपबंध जोड़ दिया था, बहुत ही कम लोग उसे समझ पाए थे और फाउलर कमेटी ने भी बिना किसी पछतावे के जिसे अपना लिया था, वह उपबंध था कि सरकार हमेशा सोने के बदले रुपये देने को तैयार रहेगी। परंतु इसका प्रतिलोभ उपबंध न होने के कारण, कि सरकार सोने के बदले रुपये देगी, सरकार को यह अधिकार मिल गया कि वह असीमित वैध मुद्रा के रूप में अपरिवर्तनीय रुपया उसी तरह जारी कर सकेगी जैसा कि बैंक ऑफ इंग्लैंड को बैंक प्रतिबंध से यह अधिकार मिल गया था कि अपरिवर्तनीय नोट असीमित मात्रा में जारी कर दे। सही दिशा में पहला कदम यह होता कि इस रिपोर्ट को रद्द कर दिया जाता और ऊपर दिए गए प्रेषण में बताए गए सुरक्षित और मजबूत भारत सरकार के प्रस्तावों की ओर तेजी से लौटा जाता। पहली शर्त यह है कि रुपये
- रिपोर्ट, पैरा 17