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साक्ष्य पर वक्तव्यऽ
भारतीय मुद्रा संबंधी आयोग के समक्ष डॉ. बी.आर. अम्बेडकर बार-एट-लॉ द्वारा प्रस्तुतःµ
- आयोग (कमीशन) द्वारा जारी प्रश्नावली के उत्तर में मैं अपने विचारों के
विषय में निम्नलिखित वक्तव्य देता हूं। मैं, आयोग द्वारा जारी प्रश्नावली के प्रश्न
सं. 4 से आरंभ करूंगा क्योंकि मेरा विश्वास है कि इसी मुख्य मामले के संबंध
में आयोग को अपना निश्चित निर्णय देने के लिए कहा गया है।
- मेरा यह दृढ़ मत है कि स्वर्ण विनिमय मान को जारी रखने का भारत को कोई
लाभ नहीं हो सकता। इसके निम्नलिखित कारण हैंः-
(1) इसमें स्वर्णमान वाली स्वाभाविक स्थिरता नहीं हैµएक विशुद्ध स्वर्णमान
इसलिए स्थिर होता है क्योंकि परिसंचरण व प्रचलन में जो सोना होता है
उसका मूल्य इतना अधिक होता है और नए सोने की ओर अतिरिक्त आपूर्ति
इतनी कम होती है कि उससे मानक की स्थिरता पर पर्याप्त प्रभाव नहीं
पड़ता। परन्तु विनिमय मान के मामले में नई वृद्धियां, जारीकर्ता की इच्छा
पर निर्भर होती हैं और उन्हें इतना बढ़ाया जा सकता है कि उससे मानक
की स्थिरता को पर्याप्त मात्रा में प्रभावित किया जा सकता है।
(2) निर्गम केवल विवेक पर आधारित है और इसमें इस विवेक का ठीक प्रकार
संचालन करने के लिए कोई प्रक्रिया नहीं हैµकभी-कभी यह कहा जाता है कि
स्वर्णमान एक कठोर मान होता है जो मानव जाति के परिवर्तनशील मामलों को
प्रकृति के चक्र से बांधे रहता है, इसके ऊपर मानवीय क्रिया का कोई नियंत्रण
नहीं हो सकता और यह कि विनिमय मान इस उदासीनता से बच निकलने का
साधन उपलब्ध कराता है। इसके उत्तर में यह कहा जा सकता है कि यद्यपि
ऽ भारतीय मुद्रा तथा वित्त संबंधी शाही आयोग का प्रतिवेदन, खंड- II, संलग्नक-29, ब्रिटिश सम्राट का
लेखन-सामग्री कार्यालय 1926, पृष्ठ 235-39