साक्ष्य पर वक्तव्य - Page 331

316 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

यह एक विवेकाधीन मुद्रा होती है, परंतु यह ऐसी तभी होती है जब मुद्रा के ऐसे साधन जुटाए जाएं जो इस विवेक को समुचित रूप में प्रयोग करने के योग्य बना सकें। कोई ऐसा नियंत्रक होना चाहिए जिसके द्वारा जारीकर्ता के विवेक को नियंत्रित किया जाए। इस दृष्टि से विनिमय मान परिवर्तनीय मान की अपेक्षा घटिया होता है। इसमें परिवर्तनीय मान तथा विनिमय मान एकसमान होते हैं, क्योंकि ये दोनों ही मुद्रा के जारी करने में विवेक के प्रयोग की अनुमति देते हैं। परंतु परिवर्तनीय मान, विनिमय मान से श्रेष्ठ होता है क्योंकि पहले में जारीकर्ता का विवेक नियंत्रित होता है जबकि बाद वाले अर्थात विनिमय मान में जारीकर्ता का विवेक अनियंत्रित होता है। यह सच है कि विनिमय मान में, विदेशी मुद्रा द्वारा विनियमन होता है। परंतु ऐसा नियंत्रण, यद्यपि किसी प्रकार का नियंत्रण न होने से बेहतर होता है, और यह लक्ष्य तक पहुंचने का केवल एक ढीला तथा अप्रत्यक्ष तरीका है तथा इस तक पहुंचने की समस्त परिस्थितियों में इस पर निर्भर नहीं रहा जा सकता।

(3) यह मितव्ययी होता है। परंतु इसी कारण ही यह असुरक्षित हैµअनेक लेखक विनिमय मान पर आसक्त हैं, क्योंकि यह सोने के प्रयोग में कुछ मात्रा में किफायत लाता है। किन्तु क्या इसकी योजना सुरक्षित है? मुद्रा की कोई भी योजना तभी अच्छी व स्वस्थ होती है जब यह किफायती तथा सुरक्षित हो। यदि वह किफायती नहीं है तो भी चलेगी, परंतु यदि वह सुरक्षित नहीं है तो निश्चय ही नहीं चलेगी। अब मैं यह निवेदन करता हूं कि यह प्रस्ताव कि मुद्रा के रूप में सोने को किफायती बनाना, उसके मूल्य के मानक के रूप में उसकी उपयोगिता को कम करना है, इतना ही सीधा-सादा तथा स्वयंसिद्ध है जितना यह प्रस्ताव कि एक माध्यम के रूप में कागज की मुद्रा या रुपये का प्रयोग सोने के प्रयोग की अपेक्षा अधिक किफायती होता है। सोने को मुद्रा से बाहर निकालने का क्या अर्थ है? इसका सीधा सा अर्थ यह है कि सोने के प्रयोग में किफायत करके, आप उससे सीधे उनकी आपूर्ति को बढ़ाते हैं और उसकी आपूर्ति को बढ़ाकर आप उसके मूल्य को और कम करते हैं अर्थात् सोने के प्रयोग में इस मितव्ययता के कारण सोना एक अवमूल्यन वाली वस्तु हो जाती है और इसलिए इस दृष्टि से वह मूल्य के एक मानक के रूप में कार्य करने के अयोग्य हो जाती है। अतएव आप के दोनों कार्य सोने में किफायत तथा उसका एक मानक के रूप में प्रयोग भी एक साथ नहीं कर सकते। यदि आप सोने में किफायत करना चाहते हैं तो फिर आपको सोने को मूल्य के मानक के रूप में जोड़ना पड़ेगा, दूसरे शब्दों में विनिमय मान की मितव्ययता उसकी सुरक्षा के साथ असंगत होती है।