आयोग द्वारा भारत में साक्षियों को परिचालित ज्ञापनऽ की प्रतिः - Page 340

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निम्नलिखित ज्ञापन में, वे मुख्य प्रश्न दिए गए हैं जो शाही आयोग भारतीय मुद्रा तथा वित्त के विचारणीय विषय के अंतर्गत उसके विचारार्थ सामने आएंगे। इस ज्ञापन को इसलिए प्रकाशित किया जाता है ताकि इच्छुक साक्षियों को अपने साक्ष्य को तैयार करने में सहायता मिल सके। इसे विस्तारपूर्ण नहीं माना जाना चाहिए और न इसकी यह मंशा है कि प्रत्येक साक्षी इसमें उठाए गए सभी प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास अवश्य करे।

(1) क्या रुपये या अन्य प्रकार के स्थिरता संबंधी उपायों से भारतीय मुद्रा तथा

विनिमय की समस्याओं का समाधान करने के लिए यह उपयुक्त समय है?

आंतरिक मूल्यों में तथा विदेशी विनिमय में स्थिरता का तुलनात्मक महत्व क्या है?

रुपये के मूल्य में वृद्धि तथा ह्रास का और स्थिर उच्च या निम्न मूल्य वाले रुपये का

व्यापार तथा उद्योग पर (कृषि सहित) व राष्ट्रीय वित्त पर क्या प्रभाव पड़ता है? (2) यदि रुपया स्थिर हो तो उसमें किस मानक तथा किस दर पर स्थिरता होनी

चाहिए?

स्थिरता के सम्बन्ध में कोई निर्णय सबसे लागू होना चाहिए? (3) यदि चुनी गई दर में, वर्तमान दर से पर्याप्त अंतर हो तो संक्रमण काल को

कैसे पूरा किया जाए?

(4) चुनी गई दर पर रुपये को बनाए रखने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए?

क्या युद्ध से पहले प्रचलित स्वर्ण विनिमय मान प्रणाली को जारी रखा जाना

चाहिए और यदि उसमें कोई रूपांतर किया जाए तो वह क्या हो?

एक स्वर्णमान निधि की संरचना, आकार, स्थान तथा काम क्या होना चाहिए?

(5) नोट जारी करने के नियंत्रण का प्रभार किस पर होना चाहिए और उसके लिए

क्या सिद्धांत हों? क्या नियंत्रण या प्रबंध, इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया को

हस्तांतरित कर दिया जाना चाहिए और यदि ऐसा किया जाए, तो हस्तांतरण की

सामान्य शर्तें क्या होनी चाहिए?

(6) भारत में सोने की टकसाल लगाने के संबंध में तथा मुद्रा के रूप में सोने के

प्रयोग के संबंध में क्या नीति होनी चाहिए?

ऽभारतीय मुद्रा तथा वित्त पर रॉयल आयोग की रिपोर्ट, खंड-3, परिशिष्ट-ए. पृ. 612