प्राक्कथन - भारत में सामाजिक बीमा (सोशल इन्श्योरेंस इन इंडिया) - Page 403

388 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है उससे छुटकारा न मिल जाए। लेखक ने जो दृष्टिकोण अपनाया है, उसके समर्थन में कारणों को स्पष्ट रूप में व निडर होकर निर्दिष्ट किया है। इस बात को महसूस करके कि भारत प्रमुख रूप से एक कृषि प्रधान देश है और कृषि में लगे लोगों को सुरक्षा की आवश्यकता पड़ती है, लेखक ने फसल बीमा की एक योजना का सुझाव दिया है जो सामाजिक बीमा के सिद्धांत पर आधारित है। यदि लेखक द्वारा सुझाई गई रूपरेखा के आधार पर, वास्तव में फसल बीमा की योजना को तैयार किया जाए तो वह ऐसी होगी जो हमारे देश की ग्रामीण जनता की दशा को काफी हद तक बेहतर बनाएगी, अकाल के भय को कम कर देगी।

सामाजिक बीमा भारत में एक नई चीज है। इस विषय से संबंधित साहित्य में भारत का योगदान स्वाभाविक रूप में बहुत कम है। इन परिस्थितियों में, श्री इदगुंजी की पुस्तक का इस विषय के सब विद्यार्थियों द्वारा निश्चय ही स्वागत किया जाएगा, क्योंकि यह विषय पर अपर्याप्त साहित्य में एक योगदान है और उससे उत्पन्न होने वाली समस्याओं की आलोचनात्मक जांच भी है। उसकी शैली प्रांजल है और उसका प्रतिपादन अत्यंत स्पष्ट है।

µबी.आर. अम्बेडकर