प्राक्कथन - भारत में सामाजिक बीमा (सोशल इन्श्योरेंस इन इंडिया) - Page 402

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प्राक्कथन *

सामाजिक बीमा तथा भारत पर श्री एम.आर. इदगुंजी की पुस्तक एक सुनियोजित शोध प्रबंध है।

यह दो भागों में विभक्त है। भाग I, का सामान्य है और इसमें दो मुख्य विषयों का विवेचन किया गया हैµ(1) सामाजिक बीमा की दो प्रमुख शाखाएं जैसे (1) श्रमिक की क्षतिपूर्ति (2) सामाजिक बीमा के विभिन्न वित्तीय पहलू जैसे वित्तीय साधन, बीमा विज्ञाता की तकनीक तथा वित्तीय प्रशासन। सामाजिक बीमा के वित्तीय पहलुओं के विवेचन का उद्देश्य, उन वित्तीय साधनों से संबंधित विभिन्न समस्याओं को स्पष्ट करना है जिनकी आवश्यकता सामाजिक बीमा योजनाओं की क्रियाविधि तथा विभिन्न प्रणालियों के लिए पड़ती है जिनके अनुसार, साधनों को इस प्रकार संगठित किया जा सकता है जिससे सामाजिक बीमा योजनाएं स्वस्थ ढंग से कार्य करें और सामाजिक बीमा के वित्तीय पक्ष से जुड़े प्रशासन की समस्याएं सुझाई जा सकें।

भाग II, में, भारत में विद्यमान स्थितियों के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक बीमा की समस्या का विवेचन किया गया है। इस भाग में भारतीय श्रमिक का क्षतिपूर्ति अधि नियम, 1923 तथा रोग बीमा के प्रावधानों का आलोचनात्मक परीक्षण किया गया है। इसके अलावा, सामाजिक सुरक्षा की बेवरिज योजना तथा न्यूजीलैंड में अपनाई गई सामाजिक सुरक्षा की योजना पर चर्चा की गई है। यह चर्चा, भारत में सामाजिक सुरक्षा के उपायों संबंधी संभावनाओं की खोज व छानबीन से समाप्त होता है। लेखक का यह मत है कि स्वस्थ सामाजिक बीमा के उपाय भारत में उस समय तक व्यवहार्य नहीं है जब तक कुछ मूलभूत कठिनाइयों को समाप्त न कर दिया जाए और देश आर्थिक रूप में पर्याप्त प्रगति न करें और आज देश में जो नितान्त गरीबी विद्यमान

* भारत में सामाजिक बीमा (सोशल इन्श्योरेंस इन इंडिया) लेखकः मनोहर आर. इदगुंजी ठाकर एंड कंपनी

लि. बम्बई, प्रथम बार प्रकाशित 1948