1. दोहरे मानक से रजत मानक तक - Page 61

46 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

आवश्यकता थी। टकसाल को प्रगलन भट्टी के मुकाबले पर खड़ा कर दिया

गया है। एक के द्वारा इतने अध्यवसाय व कौशल द्वारा बनाए गए सिक्के दूसरे

न उन्हें जल्दी से गलाकर कड़े बनवा दिए। ख्1,

दिए गए आंकड़ों से यह विदित होगा कि सभी आयात की गई चांदी से सिक्के बनाए गए तथा उन्हें मुद्रा के प्रयोजनों के लिए उपयोग किया गया। लोगों के औद्योगिक और सामाजिक उपभोग के निमित्त चांदी बहुत कम या न के बराबर रखी गई ऐसी स्थिति में यह स्पष्ट है कि सिक्के में ढाली गई चांदी का अधिकांश भाग मुद्रा से गैर-मुद्रा के प्रयोजनों के लिए निकाला गया। इस प्रकार इस मुद्रा के अभाव का गुप्त स्रोत स्पष्ट हो जाता है। उस समय के लोगों को यह बिल्कुल स्पष्ट दिखाई दे रहा था कि मुद्रा से और मुद्रा के प्रयोजनों के लिए मुद्रा के अवशोषण की दर थी जो इसके लिए उत्तरदायी थी। उसी अधिकारी का कथन उद्धृत हैःµ

‘‘अधिक आयात के बावजूद मुद्रा की मांग अभी इतनी बढ़ गई...... कि गंभीर लज्जाजनक स्थिति में यह आश्वस्त किया गया तथा परिचालित माध्यम के अभाव के कारण व्यापार लगभग ठप हो गया। जैसे ही शीघ्रता से रुपये सिक्कों में ढाले गए वे सिक्के उतनी ही तेजी से अन्दरूनी हिस्सों में ले जाए गए और वहां से वे सिक्के परिचालन से लुप्त हो गए, या तो वे सिक्के भंडार के लिए उपयोग में आए अथवा गहने बनाने के लिए उनको गलाया गया’’। ख्2,

एक मार्ग खुला हुआ था जिसके द्वारा चांदी का अतिरिक्त आयात किया जाता जो देश की मुद्रा तथा गैर-मुद्रा की आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हो सकता। परंतु चांदी का आयात शायद पहले ही से अपने चरम बिन्दु पर था। क्योंकि जैसे कि मि. सेसेल्स ने इस बारे में तर्क दिया थाःµ

‘‘समस्त विश्व की चांदी का वार्षिक उत्पादन दस मिलियन स्टर्लिंग से अधिक नहीं हुआ। पिछले कुछ वर्षों से अकेले भारत ने ही प्रतिवर्ष समस्त विश्व में पैदा की गई धातु से अधिक धातु ली है और उसके अधिकांश भाग का उपयोग किया है। यह स्पष्ट है कि यह स्थिति अधिक समय तय भयंकर उलझन पैदा किए नहीं चल सकती है। या तो यूरोपीय बाजार हमें देने के लिए असमर्थ है या हमें देने में आनाकानी करेंगे अथवा अनिच्छुक हैं अथवा चांदी के मूल्य आसमान छूने लगेंगे। ऐसी परिस्थितियों में इसका अनुमान लगाना कठिन कार्य नहीं है कि वर्तमान संकट

  1. भारत के लिए स्वर्ण-मुद्रा संबंधी कार्यवृत्त, दिनांक 8 दिसंबर, 1863 जैसा कि रिपोर्ट ऑफ दि चैम्बर

ऑफ कामर्स, 1863-64 अनुलग्नक-1 पृष्ठ 189

  1. भारत के लिए स्वर्ण मुद्रा के संबंध में कार्यवृत्त, दिनांक 1 दिसम्बर, 1863 रिपोर्ट, पृष्ठ 184 पर

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