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दोहरे मानक से रजत मानक तक

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सुरक्षित है जबकि वह अत्यन्त खतरनाक होती है। वे मुद्रा संबंधी स्थिति के बारे में इतना अधिक आरक्षित महसूस करते थे कि 1870 में जब टकसाल के कानून में संशोधन किया गया और उसे समेकित किया गया, वे इस बात से संतुष्ट थे जैसे कि कुछ भी नहीं हुआ या न कुछ होने वाला है कि 1835 के चांदी के मानक को शुद्ध तथा निष्कलंक रहने दिया जाए और सोने के मिश्रण से उसे दूषित नहीं होने दिया गया। ख्1,

खेद का विषय है कि जिन लोगों ने उस समय कहा था ख्2, कि उनसे भारतीय मुद्रा के प्रश्न को केवलµ‘‘न्यायिक’’ दृष्टि से विचार के अतिरिक्त कुछ नहीं कहा गया उन्हें इस बारे में बहुत ही कम ज्ञान था।

  1. मूल टकसाल और सिक्का ढालने के संबंध में विधेयक (मिंट एंड क्वानेज बिल) में ऐसे वाक्य खंड

सम्मिलित किए गए हैं जिनमें 1688 की विज्ञप्ति निहित है और जिसमें इस बात पर बल दिया गया है

कि सरकार को अपने लोक खजानों में सोवरन प्राप्त करना चाहिए। देखिए गजट ऑफ इंडिया, भाग v,

दिनांक 23 जुलाई, 1870। परंतु ये अंतर दिखाए गए थे कि वे बाद में चयन समिति द्वारा निकाल दिए

गए। इसके कारण यह मामला कार्यकारी के विवेक पर छोड़ दिया गया।

  1. देखिए 6 सितम्बर, 1870 को माननीय श्री स्टीफन का भाषण जिसमें क्वानेज एंड मिंट बिल का परिचय

दिया गया है देखिए सुप्रीम लैजिसलेटिव काउंसिल प्रोसीडिंग्स (संक्षेप में एस एल सी पी) खंड ए पृ.

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