2. रजत मानक और इसकी सममूल्यता का विस्थापन - Page 79

64 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

दिया जाए और सरकार को अपने विवेक पर छोड़ दिया जाए ताकि वह आवश्यकता के अनुसार मुद्रा का परिचालन कर सके। दूसरा रास्ता है कि टकसाल को खुला रहने दिया जाए और लोगों की स्वेच्छा पर छोड़ दिया जाए कि अपनी आवश्यकतानुसार मुद्रा की राशि निर्धारित कर सकें। बन्द टकसालों के बारे में आवश्यक विवेक के कार्यान्वयन के लिए मार्गदर्शन के असफल न होने वाले परीक्षणों के अभाव में खुली टकसाल का सिद्धांत में दोनों योजनाओं से श्रेष्ट माना गया है। जब प्रत्येक व्यक्ति सर्राफे के लिए सिक्का प्राप्त कर सकता है और सिक्के को सर्राफे के लिए ढाल सकता है जैसा कि खुली टकसालों के अंतर्गत होगा तो मात्रा स्वतः व्यवस्थित हो जाएगी। यदि वाणिज्य की बढ़ती हुई मांगों के लिए परिचालित माध्यम की अधिक आवश्यकता होती है तो समुदाय के हित में होगा कि इस प्रयोजन के लिए अपनी पूंजी की अधिक मात्रा परिवर्तित रहे। दूसरी ओर यदि व्यापार की स्थिति ऐसी हो कि इसके लिए कम मुद्रा की आवश्यकता हो तो सिक्के का एक भाग वापस ले लिया जाए और मुद्रा के प्रयोजनों के अलावा अन्य प्रयोजनों के लिए वस्तु के रूप में लागू किया जाए। चूंकि 1870 के अधिनियम में स्पष्ट रूप से खुली टकसाल के सिद्धांत को स्वीकार किया, इसकी कल्पना नहीं की जा सकती है कि टकसालें उस तारीख से पूर्व बंद कर दी गई थीं। सच बात तो यह है कि उन्हें सोने और चांदी दोनों के स्वतंत्र रूप से सिक्के ढालने के लिए खुली छूट थी। यद्यपि चांदी के सिक्के का ही विधिमान्य चलार्थ माना गया था परंतु भले ही यह आश्चर्यजनक बात लगे पूर्व अधिनियमों में से किसी भी अधिनियम में कोई भी ऐसा शब्द नहीं था जो टकसाल मालिक को यह दायित्व दे कि उसे जो भी धातु दी जाए वह उन सभी के सिक्के तैयार करे। यह एक ऐसी शर्त है जो खुली टकसाल पद्धति का सार है। इस सम्बन्ध में अधिनियम के उपबंध सुस्पष्ट हैं। इसके लिए आवश्यकता थीःµ

‘‘धारा 19ः उस समय लागू किए गए टकसाल नियमों के अधीन टकसाल का मालिक टकसाल में लाए गए सभी सोने और चांदी, सर्राफा तथा ­सिक्के लेगा।’’

‘‘किन्तु शर्त यह है कि इस प्रकार का सर्राफा और सिक्का ढालने के लिए उपयुक्त हो।’’

शर्त यह भी है कि किसी व्यक्ति द्वारा एक ही समय में लाई गई मात्रा सोने के मामले में भी 50 तोले से कम नहीं होनी चाहिए और चांदी के मामले में एक हजार तोले से कम नहीं होनी चाहिए।

‘‘धारा 20ः टकसाल के नियमों के अनुसार एक रुपया प्रतिशत की दर से सभी स्वर्ण सर्राफा के उत्पाद तथा उन सभी सोने के सिक्कों पर जो सिक्के ढालने के लिए लाए जाएंगे सिक्का कर के रूप में लगाया जाएगा।’’