शूद्रों का पतन
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- एक ब्राह्मण द्वारा उपनयन करने पर केवल विद्वत परिषद में ही अपील की जा सकती है और विद्वत परिषद नाटक मंडल के सभी पात्र ब्राह्मण ही हो सकते हैं।
उपरोक्त तथ्यों से यह पूर्णतः स्पष्ट हो जाता है कि उपनयन के संबंध में ब्राह्मणों को वर्चस्व प्राप्त था। वे किसी को भी उपनयन से वंचित करने में सर्वथा सक्षम थे। अतः इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि उन्होंने शूद्रों को कुचलने के लिए इस हथियार का बेरोकटोक इस्तेमाल किया।