अध्याय 11
संधि की कथा
अब तक मैंने निम्न तथ्यों को सिद्ध करने का प्रयास किया हैःµ
- ब्राह्मणों ने शूद्र को आर्यों के दूसरे वर्ण क्षत्रियों के एक वर्ग से नीचे गिरा कर समाज
के चौथे वर्ण में धकेल दिया।
- शूद्रों के दमन के लिए ब्राह्मणों द्वारा अपनाई गई फितरस थी उनका उपनयन बंद
कर देना।
- ब्राह्मणों की यह प्रतिक्रिया शूद्र राजाओं के द्वारा उनके साथ किए गए अत्याचार,
उत्पीड़न, अपमान, दमन आदि के कारण थी जिसका आशय था प्रतिशोध की
भावना।
यह सब बिल्कुल है तथापि निम्नांकित प्रश्न उठते हैंःµ
- ब्राह्मणों का विद्वेष केवल कुछ राजाओं से ही था, फिर क्या कारण है कि वे समस्त
शूद्र जाति के ही शत्रु बन गए?
- क्या द्वेष इतना जहरीला था कि ब्राह्मणों ने घृणावश होकर उनसे बदला लेने पर उतर
आए?
- क्या दोनों पक्षों में सुलह नहीं हुई? यदि सुलह हुई थी तो ब्राह्मणों के पास शूद्रों के
पतन के लिए कोई कोई स्पष्ट कारण नहीं था।
- शूद्रों ने इस अधोपतन को कैसे सहन किया?
मैं मानता हूं ये गूढ़ प्रश्न हैं तथा इन पर ठंडे दिल से विचार करने की आवश्यकता है। प्रश्न प्रासंगिक है इसलिए इनका उत्तर दिया जाना चाहिए।
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यह प्रश्न कि कुछ राजाओं के साथ क्लेश होने के कारण ब्राह्मणों को शूद्रों के संपूर्ण समुदाय से बदला लेने की क्यों ठानी, यह प्रश्न न केवल सामयिक ही है बल्कि बहुत विशिष्ट भी है। यदि दो बातों को ध्यान में रखकर देखा जाए तो उत्तर मिल जाएगा।
पहले तो अध्याय 9 में वर्णित ब्राह्मणों और शूद्र राजाओं के बीच कलह व्यक्तिगत कलह नहीं थी। हालांकि ऐसा लगता है। दूसरी ओर ब्राह्मण एकजुट हो गए थे। वशिष्ट