162 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
प्रकरण के अतिरिक्त सभी झगड़े ब्राह्मण मात्र से थे। ठीक इसी प्रकार जिन राजाओं से ब्राह्मणों का संघर्ष हुआ, वे सभी शूद्र वंश के थे और सुदास से संबद्ध थे।
जहां तक सुदास का प्रश्न है यह संघर्ष ब्राह्मणों और क्षत्रियों के एक अंग शूद्रों के बीच था। इनमें संदेह नहीं कि इस बात के हमारे पास प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं हैं कि शेष क्रोधभाजन राजा भी क्षत्रियों के एक अंग शूद्रों से ही सम्बद्ध थे। किंतु हमारे पास अन्य प्रमाण हैं जिनसे निष्कर्ष निकलता है कि वे सुदास के वंशज थे।
महाभारत ख्1, के आदि पर्व से उदृत वशविल देखने योग्य है। ब्राह्मणों के साथ संघर्ष में वर्णित राजाओं के अंतर संबंधों पर यह रोचक प्रकाश डालती है। पुरुरवा ख्2, वैवस्वत मनु का पौत्र और इला का पुत्र था। नहुष ख्3, पुरुरवा का पौत्र था। निमि ख्4, इक्ष्वाकु का पुत्र था जो स्वयं मनु वैवस्त का पुत्र था। इक्ष्वाकु की 28वीं पीढ़ी में त्रिशंकु ख्5, हुआ। इक्षवाकु की 50वीं पीढ़ी में सुदास ख्6, था। वेनमनु ख्7, वैवस्वत का पुत्र था। ये सभी मनु के वंशज होने के कारण सभी सुदास से संबंधित होने चाहिए। सुदास के शूद्र होने के प्रमाण हैं। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि वे सभी शूद्र थे।
हमारे पास प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं हैं किन्तु यह सोचना असंगत न होगा कि संघर्ष पूरे शूद्र समुदाय के साथ था, अकेले सुदास के साथ नहीं। स्मरणीय है कि ये संघर्ष अति प्राचीन काल में हुए जब लोगों में मनसावाचाकर्मणा मध्य कबीलाई भावनाएं भरी होंगी।
वंशावली
मारीची
कश्यप-दक्षयानी (दक्ष प्रजापति की एक कन्या)
| Col1 | Col2 |
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आदित्यगण विवस्वत
| Col1 | Col2 |
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| (10 | Col2 | Col3 | Col4 | Col5 | Col6 | euq ;e iq=k) | Col8 | Col9 | Col10 |
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येन धृरतु नौश्यौत नाभाग इक्षवाकु कुरूप र्श्यात इला प्रशाद्र नाभगोशाला
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म्यूर खंड 1, पृष्ठ 126
म्यूर खंड 1, पृष्ठ 126
वही पृष्ठ 307
म्यूर खंड 1, पृष्ठ 316
वही पृष्ठ 362
वही पृष्ठ 362
ऋग्वेद दिवोदास को सुदास का पिता कहा गया है तथा पुरु का राजा पुरु इक्षवाकु कहलाते थे।