28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
- देवताओं ने ब्रह्मा की संतान वृद्धि करते हुए प्रारंभ में ही व्यवस्था दे दी -
ब्राह्मण वह है जो यह जानता है कि देवजन उसके अधीन रहेंगे।
- जिसकी ‘‘श्री’’ और ‘‘लक्ष्मी’’ पत्नियां हैं, ‘‘दिन’’ और ‘‘रात’’ जिसके
अंग रक्षक हैं, ‘‘तारागण’’ और जिसके आभूषण हैं और अश्विनी के समान
दैदीप्यान जिसका मुख है, वह मेरी समस्त कामनाओं को पूरा करे, मुझे सभी
पदार्थ प्रदान करे।
वातसनेयी संहिता में दिया गया दूसरा सिद्धांत पुरुष सूक्त से बिल्कुल ही भिन्न है। वह इस प्रकार हैःµ
वा.स. XIV -28 ख्1, ः- उसने एक की स्तुति की। प्राणी बने अग्नि के साथ स्तुति की, ब्राह्मण की रचना ब्राह्मणस्पति शासक बना। उन्होंने पांच के साथ स्तुति की। विद्यमान पदार्थ उत्पन्न हुए। भूतानामपति शासक बना। उन्होंने सात के साथ स्तुति की। सप्तर्षि उत्पन्न हुए, धात्री शासक बना। उन्होंने नौ के साथ स्तुति की। पितागण उत्पन्न हुए, अदिति शासक बने। उन्होंने ग्यारह के साथ स्तुति की, ऋतुएं उत्पन्न हुई, आर्तव शासक बने। उन्होंने तेरह के साथ स्तुति की। मास (महीने) उत्पन्न हुए, वर्ष राजा बना। उन्होंने पन्द्रह के साथ स्तुति की। क्षत्रीय उत्पन्न हुआ, इंद्र राजा बना। उन्होंने सत्रह के साथ स्तुति की। पशु उत्पन्न हुए बृहस्पति राजा बने। उन्होंने उन्नीस के साथ स्तुति की। शूद्र और आर्य (वैश्य) उत्पन्न हुए, दिवस और रात्रि राजा बने। उन्होंने इक्कीस के साथ स्तुति की। अविभाजित सुमधारी पशु उत्पन्न हुए। पुषान राजा बने। उन्होंने तेइस के साथ स्तुति की। लघु पशु उत्पन्न हुए, पुषान राजा बने उन्होंने पच्चीस के साथ स्तुति की। वन्य जीव उत्पन्न हुए, वायु राजा बने। (ऋग्वेद 10.90.8) उन्होंने सत्ताईस के साथ स्तुति की। धरती और स्वर्ग अलग हुए। वसु, रूद्र और आदित्य उनसे विलग हो गए, वे राजा बने। उन्होंने उन्तीस के साथ स्तुति की। प्राणी उत्पन्न हुए। मास के कृष्ण और शुक्ल पक्ष बने। उन्होंने इक्तीस के साथ स्तुति की। विद्यमान पदार्थ शांत हो गए, प्रजापति परमेष्ठि राजा बने।
अब हम कृष्ण यजुर्वेद पर आते हैं। कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता में पांच व्याख्याएं हैं। श्लोक ( IV 3.10) की व्याख्या शुक्ल यजुर्वेद की वाजसनेयी संहिता के श्लोक ( xiv, 28) की व्याख्या के समान है जिसका ऊपर उल्लेख किया जा चुका है। शेष जिनमें शूद्रों की उत्पत्ति का उल्लेख किया गया है इस प्रकार हैः-
तैत्तिरीय संहिता ( ii 4-13.1) ख्2, ‘‘देवता राजन्य से भयभीत थे, जब वह गर्भ में था उन्होंने उसे पाश में बांध दिया। परिणामस्वरूप वह राजन्य बंधन युक्त उत्पन्न हुआ। यदि वह अजन्मा बंधन मुक्त जन्म लेता है तो वह अपने शत्रुओं का वध करता। यदि राजन्य यह इच्छा करे कि वह बंधन मुक्त उत्पन्न हो और अपने शत्रुओं का हनन करता रहे तो
म्यूर खंड 1, पृष्ठ 18
वही, पृष्ठ 22