अशुचि और अछूत
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II
दूसरा प्रश्न है कि क्या अन्त्य, अन्त्यज, अन्त्यवासिन तथा बाह्य शब्दों से वही बोध होता है जो अर्थ अछूत से। दूसरे शब्दों में क्या यह एक वर्ग के लोगों के लिए भिन्न-भिन्न नाम हैं?
यह दुर्भाग्य की बात है कि धर्मसूत्र इस प्रश्न का उत्तर देने में असमर्थ हैं। अस्पृश्य शब्द दो जगह आया है। (एक सूत्र में एक बार और फिर स्मृति में एक बार) लेकिन एक भी जगह उन जातियों की गिनती नहीं की गई, जिनका यह शब्द द्योतक है। यही स्थिति अन्त्य शब्द के बारे में है। यद्यपि अन्त्य शब्द छः जगह आया है (दो सूत्रों में और चार स्मृतियों में) लेकिन उनमें किसी स्थल पर भी यह नहीं लिखा है कि इस शब्द के अंतर्गत कौन-कौन जातियां आती हैं? इसी तरह बाह्य शब्द चार जगह आया है। (दो सूत्रों में और दो स्मृतियों में) अन्त्यवासिन तथा अन्त्यज ये दोनों शब्द अपवाद रूप हैं। किंतु यहां भी किसी धर्म सूत्र में उनकी गिनती नहीं है, केवल स्मृतियों में उनकी गिनती है। अन्त्यवासिन की गिनती मध्यमंगिरस नामक स्मृति में दी गई है और अन्त्यज की अत्रि स्मृति तथा वेद व्यास स्मृति में। वे कौन हैं। यह नीचे तालिका से स्पष्ट हो जाएगा -
अन्त्यवासिन अन्त्यज
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1- uV pk.Mky 2- esn 'oid 3- fHkYy uV 4- jtd esn 5- peZdkj fHkYy 6- cq#n jatd 7- oSQorZ peZdkj fojkV nkl HkV~V dksfyd iq"dj |