बहिष्कृत व्यक्ति अछूत कब बने?
बहुत दब कर निकलते हैं।’’
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ऊपर का उद्धरण इतना अधिक छोटा है कि उससे कोई निश्चित परिणाम निकालना असंभव है। लेकिन इसमें एक बात महत्त्व की है और वह यह कि फाहियान का जो वर्णन है वह केवल चांडालों से संबंध रखता है। और ह्वेनसांग का वर्णन चांडालों के अतिरिक्त दूसरी जातियों के बारे में भी है। यह एक बड़े महत्त्व की बात है। ऐसे वर्णन के विरुद्ध कोई ऐसा-वैसा तर्क नहीं लिया जा सकता क्योंकि यह चांडालों के अतिरिक्त दूसरी जातियों पर भी लागू है। इसलिए यह एकदम संभव है कि जिस समय ह्वेनसांग भारत आया तब अस्पृश्यता की उत्पत्ति हो गई थी।
ऊपर जो कुछ कहा जा चुका है उसके आधार पर हम यह कह सकते हैं कि 200 ई. में तो अस्पृश्यता का अस्तित्व नहीं था, किंतु 600 ई. तक इसका जन्म हो गया था।
छुआछूत की उत्पत्ति का निर्णय करने के लिए यह दो ऊपर की और नीचे की सीमाएं हैं। क्या हम छुआछूत की उत्पत्ति की कोई ऐसी तिथि निश्चित कर सकते हैं जो लगभग ठीक हो? मैं समझता हूं कि यदि हम गोमांसाहार से आरंभ करें तो हम कर सकते हैं। गोमांसाहार ही छुआछूत के मूल में निहित है। यदि हम गोमांसाहार निषेध को अपने चिंतन की आधारशिला बनाएं तो इसका यह मतलब है कि अस्पृश्यता की उत्पत्ति का गोवध तथा गोमांसाहार निषेध से सीधा संबंध होना चाहिए। यदि हम यह बता सकें कि गोवध किस समय तक अपराध बना और गोमांसाहार किस समय पाप बना तो हम अस्पृश्यता की उत्पत्ति की एक ऐसी तिथि निश्चित कर सकते हैं जो लगभग ठीक हो।
गोवध कब एक अपराध घोषित किया गया?
हम जानते हैं कि मनु ने न तो गोमांसाहार का निषेध किया और न गोवध को अपराध ठहराया। यह अपराध कब बना? जैसा कि डी.आर. भंडारकर ने स्पष्ट किया है चौथी ई. में किसी समय गुप्त नरेशों द्वारा गोवध प्राण दंडनीय अपराध घोषित किया गया।
इसलिए हम कुछ विश्वास के साथ कह सकते हैं कि छुआछूत 400 ई. के आसपास किसी समय पैदा हुई और बौद्ध धर्म और ब्राह्मण धर्म के संघर्ष में से पैदा हुई है। इस संघर्ष ने भारत के इतिहास को पूरी तरह बदल दिया है। खेद है कि भारत के इतिहास के विद्यार्थियों ने इसके अध्ययन की उपेक्षा की है।