7
प्रामाण्य निर्णय नहीं है, बाल की खाल निकालना है।
मेरे अध्ययन में दूसरी बात यह है कि मेरे आलोचक इस बात पर ध्यान दें कि मैं अपनी कृति को अंतिम मानने का दावा नहीं करता। मैं उनसे नहीं कहूंगा कि वे इसे अंतिम निर्णय मान लें। मैं उनके निर्णय को प्रभावित करना नहीं चाहता। वे अपना स्वतंत्र निर्णय लें। मैं तो इतना ही कहूंगा कि क्या मेरा यह सिद्धांत फिलहाल कुछ काम का है या नहीं। जब तक कि कोई वैध अनुमान किया जा सके जो तथ्यों के निकट हो, उन्हें एक अर्थ देता हो जिसके बिना उनका कार्य कठिन हो जाए तो अवश्य उसे लेकर आगे बढ़ा जा सकता है। मेरी अपने आलोचकों से यही आकांक्षा है कि वे इस पर निष्पक्ष दृष्टिपात करेंगे।
जनवरी 1, 1948 डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
1, हार्डिंग एवेन्यू,
नई दिल्ली।