6 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
ही होगा। यह काम अतीत को पुनर्जीवित करना, तथ्यों का संकलन करना और उन्हें जोड़ना है और एक नई कथा को जन्म देना है यह कार्य उसके सदृश्य है जब कोई पुरातत्ववेत्ता टूटे-फूटे पत्थरों को जोड़कर एक नए शहर की रचना कर दे या कोई जीवाश्म शास्त्री किसी लुप्त जीव की बिखरी हुई हड्डियों और दांतों को जोड़कर उसकी आकृति बना दे या कोई चितेरा अंतरिक्ष की रेखाओं, अवशेषों को निकाल कर पर्वत की ढलान पर एक दृश्य की रचना कर दे। ऐसी पुस्तक की रचना भी इतिहास से अधिक कलाकृति है। अस्पृश्यता की उत्पत्ति भी अतीत के गर्भ में समाई हुई है जिसे कोई नहीं जानता। इसे जीवंत बनाना एक इतिहास को नगर का रूप देने के प्रयत्न के समान है जो युगों पूर्व नष्ट हो गया था, उसे मूल स्वरूप प्रदान करने के समान है। इसके लिए कल्पना और अनुमान एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। परंतु यह किसी खोज के तिरस्कार का कारण नहीं हो सकता। बिना कुशल कल्पना के वैज्ञानिक प्रश्न हल नहीं होते और सही अनुमान विज्ञान की आत्मा है। जैसा कि मैक्सिम गोर्की ने कहा हैµ
फ्विज्ञान और साहित्यय् में पर्याप्त समानता है। दोनों के लिए तुलना और अन्वीक्षण अध्ययन बहुत महत्त्वपूर्ण है, कलाकार और वैज्ञानिक दोनों के लिए कल्पना और अंतःदृष्टि की आवश्यकता है। कल्पना और अंतःदृष्टि उन सम्पर्क सूत्रों को जोड़ने वाली कड़ी है जो लुप्त हो गई है और वैज्ञानिकों को अनुमान तथा सिद्धांत निश्चित करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं जो मोटे तौर पर ठीक से और सफलतापूर्वक प्रकृति के रूप और प्रकृति के अध्ययन की सोच प्रदान करता है। ये साहित्यिक कृतियां हैं। पात्रों की रचना और उनके रूप निर्धारण के लिए भी कल्पना और अंतःदृष्टि अपनी सोच के अनुरूप सृष्टि करती है।य् [*]
इसलिए खोई हुई कडि़यों को पुनः जोड़ने के प्रयास करने के लिए मुझे क्षमा याचना करने की आवश्यकता नहीं है। केवल इसीलिए मेरे सिद्धांतों को दूषित कहा जाना चाहिए कि इन कडि़यों का आधार शुद्ध संयोजन नहीं है। मेरा सिद्धांत जहां तथ्यों और तथ्यों के अनुमान पर आधारित नहीं है, वह अनुमानित प्रकृतियों के परि स्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है जिसमें संभावनाओं की बहुत आशा है। ऐसी कोई बात नहीं है कि मैं अपने सिद्धांत के बारे में अपने पाठकों से स्वीकृति का अनुरोध करूं कि वे उन पर विश्वास करते हुए स्वीकार कर लें। मैंने कम से कम यह तो बता दिया है कि इसके पक्ष में जो संभावनाएं मैंने प्रस्तुत की हैं उनका कोई आधार है। मैंने एक झलक मात्र ही प्रस्तुत की है इसे यह कहना कि उसका आधार कोई