अध्याय 1
गैर-हिन्दुओं में छुआछूत
इस पुस्तक के इन पृष्ठों में इस प्रश्न का उत्तर देने की चेष्टा की गई है कि अछूत कौन हैं और छुआछूत कैसे पैदा हुई है?
विषय की तह तक पहुंचने से पहले कुछ बुनियादी सवालों का जवाब देना आवश्यक है। पहला प्रश्न है कि क्या संसार में केवल हिंदूओं में ही छुआछूत मौजूद है। दूसरा प्रश्न है कि यदि गैर-हिंदुओं तक में यह रोग है तो हिंदुओं द्वारा बरती जाने वाली छुआछूत और गैर-हिंदुओं की छुआछूत में क्या अंतर है? दुर्भाग्य से अभी तक किसी ने ऐसा तुलनात्मक अध्ययन नहीं किया। इसी का परिणाम है कि अनेक लोग यह तो जानते हैं कि हिंदुओं में छुआछूत है, किंतु वे यह नहीं जानते कि इसकी
खास बात क्या है? इसकी विकरालता और खासियत सही ढंग से समझ लेने पर ही अछूतों की सही स्थिति समझ में आ सकती है और उसी से छुआछूत की उत्पत्ति भी जानी जा सकती है।
यह उचित ही होगा कि पहले हम इस बात की जांच करें कि आदिम और प्राचीन समाज में क्या स्थिति थी? क्या वे छुआछूत को स्वीकार करते थे? सबसे पहले यह बात स्पष्ट होनी चाहिए कि छुआछूत का अर्थ क्या है? इस बारे में सभी का एक ही मत होगा। सभी इस बात को स्वीकार करेंगे कि छुआछूत का आधार गंदगी, अशुचता तथा छूत लग जाने की आशंका और उससे मुक्त होने के तरीके तथा उपाय हैं।
जब आदिम सामाजिक जीवन की मीमांसा इस उद्देश्य से की जाती है कि हमें पता लगे कि वे लोग उपर्युक्त अर्थ में छुआछूत से परिचित थे या नहीं, इसमें संदेह नहीं रहता।
आदिम समाज केवल अशुद्धि की कल्पना से परिचित नहीं था वरन् उसके इस विश्वास के कारण धार्मिक रीतियों की एक जीवन पद्धति बन गई थी। आदि मानव
गैर-हिन्दुओं में प्रदूषण के संबंध में तथ्य फ्हेसि्ंटग्स एनसाइक्लोपीडिया ऑफ रिलीजंस एंड ईथिक्स वाल्यूम X आर्टिकल प्योरीफिकेशन, पृ. 455-504 से लिए गए हैं।