1. गैर-हिन्दुओं में छुआछूत - Page 27

12 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

अशुद्धि के निम्नलिखित कारण समझता थाः

  1. कुछ विशेष घटनाओं का घटना,

  2. कुछ वस्तुओं से सम्पर्क, और

  3. कुछ व्यक्तियों से सम्पर्क।

आदिम काल के लोगों का यह विश्वास था कि फ्अशुद्धि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी लग जाती है। वह समझता था कि अशुद्धि का एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में लग जाना विशेष अवस्थाओं में विशेष बात है। जैसे खाने-पीने आदि के प्राकृतिक कार्य के समय’’। जीवन की जिन घटनाओं को प्राचीन मनुष्य अपवित्रता का कारण मानता था, उनमें निम्नलिखित मुख्य थींःµ

  1. जन्म 2. दीक्षा, संस्कार

  2. वयसंधि 4. विवाह

  3. सहवास 6. मृत्यु

गर्भवती माताओं को अशुद्ध माना जाता था और वे दूसरों में अशुद्धि फैलाने वाली मानी जाती थीं। माता की अपवित्रता बच्चों तक में फैलती थी।

संस्कार और व्यस्क हो जाना जीवन की वे अवस्थाएं हैं जो स्त्री-पुरुष के शारीरिक संबंध तथा सामाजिक जीवन में प्रवेश की द्योतक हैं। उन्हें एकान्त में रहना होता था, विशेष आहार करना होता था, शरीर पर लेप आदि करना पड़ता था और अंगछेदक भी, जैसे सुन्नत अमरीकी आदिवासियों में जिन लोगों का संस्कार होता था, वे न केवल विशेष भोजन ग्रहण करते थे बल्कि समय-समय पर ऐसी औषधियां भी लेते थे जिनसे उन्हें वमन हो जाएं।

विवाह के रीति-रिवाजों से ऐसा मालूम होता है कि आदिम काल का मनुष्य विवाह को पवित्र समझता था। कभी-कभी विवाहिता को अपनी जाति के आदमियों के साथ सहवास सहन करना पड़ता थाµजैसे कि आस्ट्रेलिया में, अथवा जाति के मुखिया या वैद्य के साथ जैसा कि अमरीका में, या पति के मित्रों के साथ जैसा कि पूर्व अफ्रीका के कबीलों में होता था। कभी-कभी पति तलवार से पत्नी को एक

खरोंच लगाता था। कभी-कभी पति से शादी होने से पहले पत्नी को वृक्ष से शादी करनी पड़ती थी, जैसे मुंडा जाति में होता था, ये जितने भी विवाह के रीति-रिवाज थे उनका उद्देश्य इतना ही था कि व्यक्ति को फ्अपवित्रताय् से बचाए रखें।

आदिम काल के मनुष्य के लिए फ्मृत्युय् सबसे अधिक अशुद्धि कारक होती थी, न केवल मृतदेह अपितु मृत व्यक्ति की वस्तुओं को लेना भी फ्अपवित्रय् होता था। औजारों