2. हिन्दुओं में छुआछूत - Page 37

22 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

चढ़ा दी जाती है। गांव के चारों ओर उसका रक्त छिड़क दिया जाता है और अंत में ग्रामवासियों में पशु का मांस बांट दिया जाता है। प्रत्येक हिंदू, प्रत्येक ब्राह्मण चाहे वह गोमांस भक्षी न भी हो अपने हिस्से का मांस अवश्य लेता है। यह बात किसी स्मृति में नहीं लिखी है, लेकिन इसकी एक रिवाज चली आ रही है। हिन्दुओं के ये रीति-रिवाज कानून / विधि से भी ऊपर हैं।

यदि यहीं तक सीमा होती तो यह आसानी से कहा जा सकता था कि हिन्दुओं में अशुद्धि की जो धारणा है वह आदिम तथा प्राचीन समाज में विद्यमान अशुद्धि की धारणा से किसी तरह से भिन्न नहीं हैं लेकिन यहीं इतिश्री नहीं हो जाती क्योंकि हिंदू एक और तरह की छुआछूत को मानते है जिसका अभी उल्लेख नहीं किया गया है।

  1. अध्याय पांच - 143

  2. अध्याय पांच - 87

कुछ जातियां पुश्तैनी छुआछूत की शिकार हैं। इन जातियों की संख्या इतनी अधिक है कि बिना किसी विशेष सहायता के एक सामान्य व्यक्ति के लिए उनकी एक पूरी सूची बना लेना आसान नहीं है। भाग्यवश 1935 में भारत सरकार ने इस प्रकार की एक सूची तैयार की थी। वह 1935 के ही गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट के अधीन निकाले गए फ्आर्डर इन काऊंसिलय् (आज्ञापत्र) के साथ संलग्न है। यह लम्बी सूची 9 भागों में विभक्त है। एक भाग का संबंध एक प्रांत से है और उसमें उस प्रांत की उपजातियों, नस्लों, कबीलों अथवा उन समूहों की गणना की गई, जो सारे प्रांत अथवा उसके एक हिस्से में अछूत माने जाते हैं। यह सूची विस्तृत और प्रामाणिक अथवा प्राधिकृत कही जा सकती है। इस बात को स्पष्ट करने के लिए कि हिंदू लोग जातियों की कितनी बड़ी संख्या को वशांनुगत या जन्मजात अछूत मानते हैं, मैं ‘आर्डर इन काऊंसिल’ की वह सूची यहां दे रहा हूंःµ

सूची

भाग- I मद्रास

अजिला

अरुंददियार कल्लाडी कोडालो

आदि आध्रं कुडुम्बन गासी

आदि द्रविड कुरवन गोडागली

आदि कर्नाटक कुर्ग गोडारी

कनक्कन कूसा गोड्डा