30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
कोडालो जग्गलि बावुरि
गाँडा डंडारी बांसोर या बुरुढ़
गोखा देवर मंगन
गोडरा धोबा मदारी
महुरिया मेहरा या महार सतमानी
माला, मांग मोची या मुची सियाल
मादिगा रेल्ली सुपरि
मेहतर या भंगी बाल्मीकि हड्डी या हाड़ी
(2) खोंदमल जिले को छोड़कर शेष सारे प्रांत में, सम्भलपुर जिले में और
मद्रास प्रेसिडेंसी की विशाखापत्तनम् और गंजाम एजेंसियों से भारत सरकार
(उड़ीसा का गठन) आदेश, 1936 के प्रावधानों के अंतर्गत उड़ीसा को
अंतरिम भूमि भाग मेंः पान या पानो
(3) खोंदमल जिले और इसी प्रकार उड़ीसा को दिए गए भूमि भाग के अतिरिक्त
शेष सारे प्रांत मेंः डोम या डम्बो
(4) सम्भलपुर जिले को छोड़कर शेष सारे प्रांत मेंः घासी या घसिया, तुरि,
बौरो, भुइया, भूमिज
(5) सम्भलपुर जिले की नवपाडा सब डिवीजन मेंः कोरी, नगाड़ची और
प्रधान जातियां।
यह दिल दहला देने वाली सूची है। इसमें 429 जातियां सम्मिलित हैं यदि इनकी संख्या घटाई जाए तो इसका मतलब है कि देश में आज 5-6 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनके स्पर्श मात्र से हिंदू अशुद्ध हो जाते हैं। निश्चय ही आदिम तथा प्राचीन समाज में जो छुआछूत विद्यमान थी, वह इन भारत व्यापी करोड़ों लोगों की वंशानुगत अस्पृश्यता के मुकाबले में नगण्य है। हिन्दुओं की यह छुआछूत बहुत विचित्र है। संसार के इतिहास में इसकी तुलना नहीं है। एशिया और यूरोप की बहुत-सी जातियों की जनसंख्या से भी बड़ी जनसंख्या की अस्पृश्यता अपनी जनसंख्या की अधिकता के कारण अतुलनीय नहीं है, अपितु और दूसरे कारणों से भी बेमिसाल है।
इन 429 अछूत जातियों को अस्पृश्य बना देने वाली छुआछूत की हिन्दुओं की जीवन पद्धति में ऐसी विशेषताएं है जों अहिन्दू जातियों द्वारा बरती जाने वाली प्रथा में भी नहीं है चाहे वे आदिम युगीन हों अथवा प्राचीन कालीन।